Home देशWWE का ‘वीर महान’ बना प्रेमानंद महाराज का शिष्य, रिंग की चमक छोड़ वृंदावन में भक्ति का रास्ता चुना

WWE का ‘वीर महान’ बना प्रेमानंद महाराज का शिष्य, रिंग की चमक छोड़ वृंदावन में भक्ति का रास्ता चुना

by ashishppandya90@gmail.com
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WWE रिंग में अपनी ताकत और आक्रामक अंदाज़ से पहचान बनाने वाले रिंकू सिंह राजपूत, जिन्हें रेसलिंग की दुनिया ‘वीर महान’ के नाम से जानती है, आज पूरी तरह आध्यात्मिक जीवन की ओर मुड़ चुके हैं। प्रेमानंद महाराज की शरण में पहुंचकर वीर महान ने दुनियादारी से दूरी बना ली है और इन दिनों वृंदावन में भक्ति में लीन नजर आते हैं। हाल ही में प्रेमानंद महाराज के साथ साझा की गई उनकी एक सेल्फी सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही है, जिसे उनके प्रशंसकों के साथ-साथ संत परंपरा से जुड़े भक्तों का भी खूब प्यार मिल रहा है।

सोशल मीडिया पर रिंकू सिंह राजपूत के कई वीडियो पहले भी सामने आ चुके हैं, जिनमें वह प्रेमानंद महाराज के साथ नजर आते हैं। 12 सितंबर 2023 को साझा किए गए एक वीडियो में उन्होंने भावुक होकर कहा था कि यदि आज्ञा मिले तो वह यहीं, यानी वृंदावन में ही आकर रह जाएंगे। इसके बाद 9 दिसंबर 2024 को पोस्ट किए गए एक और वीडियो में उन्होंने साफ शब्दों में भगवत भक्ति का मार्ग अपनाने की बात कही थी। इंस्टाग्राम पोस्ट में उन्होंने लिखा था “नाथ अब कहीं भी भटकना गवारा नहीं, बस आपकी शरण में ही हम भारतवासियों का सहारा सही।”

रिंकू सिंह राजपूत का जीवन संघर्षों से भरा रहा है। उत्तर प्रदेश के भदोही जिले के गोपीगंज में 8 अगस्त 1988 को जन्मे रिंकू एक ट्रक ड्राइवर के बेटे हैं। नौ भाई-बहनों के साथ एक छोटे से कमरे में रहने वाले रिंकू ने गरीबी के बीच अपने सपनों को पंख दिए। उन्होंने शुरुआत भाला फेंक और क्रिकेट से की, फिर बेसबॉल के जरिए अंतरराष्ट्रीय पहचान बनाई। साल 2012 में उन्होंने पूरी तरह शाकाहारी जीवन अपना लिया था।

बेसबॉल से संन्यास के बाद 2018 में रिंकू WWE से जुड़े और ‘वीर महान’ के नाम से रेसलिंग की दुनिया में उतरे। वह जिंदर महल के साथ टैग टीम Indus Sher का हिस्सा रहे और WWE में भारत का नाम रोशन किया। हालांकि अप्रैल 2024 में उन्हें WWE से रिलीज कर दिया गया। इसके बाद से उनका झुकाव लगातार आध्यात्म की ओर बढ़ता गया।

आज वीर महान ज्यादातर समय वृंदावन में बिताते हैं और भगवान की भक्ति में रम चुके हैं। एक इंटरनेशनल स्पोर्ट्स स्टार से संत शरणागत तक का उनका सफर न सिर्फ प्रेरणादायक है, बल्कि यह भी दिखाता है कि सफलता के शिखर पर पहुंचने के बाद भी इंसान शांति और सत्य की तलाश में अध्यात्म का मार्ग चुन सकता है।

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