झोपड़पट्टी पुनर्वसन योजना यानी एसआरए प्रोजेक्ट से जुड़े बिल्डरों के मुनाफे पर इनकम टैक्स न लगाए जाने की मांग एक बार फिर तेज हो गई है। इस मुद्दे को लेकर रिपब्लिकन पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और केंद्रीय सामाजिक न्याय राज्यमंत्री रामदास आठवले ने संसद परिसर में केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण से मुलाकात की।
रामदास आठवले ने कहा कि एसआरए प्रोजेक्ट के तहत झोपड़पट्टीवासियों को बिल्डरों द्वारा मुफ्त आवास उपलब्ध कराया जाता है। इसके अलावा प्रोजेक्ट के दौरान राज्य सरकार को विभिन्न करों और शुल्कों के रूप में बड़ी रकम भी चुकानी पड़ती है। ऐसे में सभी खर्चों के बाद जो सीमित मुनाफा बिल्डरों को मिलता है, उस पर पहले कभी इनकम टैक्स नहीं लगाया गया था। लेकिन अब नए प्रावधानों के तहत एसआरए प्रोजेक्ट के मुनाफे पर इनकम टैक्स वसूला जा रहा है, जिससे विकासकों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ बढ़ गया है।

केंद्रीय मंत्री आठवले ने वित्त मंत्री को अवगत कराया कि मुंबई देश की आर्थिक राजधानी है और मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस द्वारा मुंबई को झोपड़पट्टी मुक्त करने का संकल्प लिया गया है। इस लक्ष्य को हासिल करने में एसआरए प्रोजेक्ट की अहम भूमिका है। यदि इन प्रोजेक्ट्स पर अतिरिक्त टैक्स लगाया गया, तो झोपड़पट्टी पुनर्वसन की रफ्तार धीमी हो सकती है।
रामदास आठवले ने स्पष्ट रूप से मांग की कि एसआरए प्रोजेक्ट पूरा होने के बाद बिल्डरों को जो मुनाफा होता है, उस पर भारत सरकार को इनकम टैक्स नहीं लगाना चाहिए। उन्होंने कहा कि यह मांग मुंबई और महाराष्ट्र के सभी एसआरए डेवलपर्स की ओर से रखी गई है और इसका लिखित निवेदन वित्त मंत्री को सौंपा गया है।

इस मुलाकात के दौरान रिपब्लिकन पार्टी के उत्तर प्रदेश अध्यक्ष पवन गुप्ता और पुणे निवासी डेवलपर अतुल गोयल भी मौजूद थे। रामदास आठवले ने जानकारी दी कि वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने इस मांग पर गंभीरता से विचार करने का आश्वासन दिया है।