मुंबई मेयर पद के रिजर्वेशन लॉटरी को लेकर सियासत तेज हो गई है। मुंबई समेत राज्य की 29 महानगरपालिकाओं के लिए मेयर पद का आरक्षण तय करने की लॉटरी में मुंबई का मेयर पद सामान्य महिला के लिए आरक्षित हुआ है। इसी फैसले के खिलाफ उद्धव ठाकरे गुट की शिवसेना ने लॉटरी प्रक्रिया का बॉयकॉट कर दिया है। ठाकरे गुट का आरोप है कि यह पूरी लॉटरी प्रक्रिया जानबूझकर सत्ताधारी दल के फायदे को ध्यान में रखकर तय की गई है और इसमें OBC और अनुसूचित जातियों के साथ अन्याय हुआ है।
दरअसल, मुंबई म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन के चुनाव नतीजों के बाद सबकी नजर मेयर पद के रिजर्वेशन पर टिकी थी। अगर यह पद अनुसूचित जाति या अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित होता, तो ठाकरे गुट का मेयर बनना लगभग तय माना जा रहा था, क्योंकि इन कैटेगरी से बीजेपी का कोई उम्मीदवार नहीं है। लेकिन सामान्य महिला के लिए आरक्षण निकलने से बीजेपी को बड़ी राहत मिली है। मुंबई समेत कुल 17 म्युनिसिपैलिटी में सामान्य कैटेगरी के लिए महिला मेयर चुनी जाएंगी।

रिजर्वेशन लॉटरी के ऐलान के बाद उद्धव ठाकरे गुट ने तीखा विरोध जताया। पार्टी नेता किशोरी पेडनेकर ने कहा कि यह लॉटरी सत्ताधारी पार्टी के मैंडेट को देखकर निकाली गई है। उन्होंने आरोप लगाया कि ओबीसी और शेड्यूल्ड कास्ट को जानबूझकर दरकिनार किया गया। पेडनेकर ने सवाल उठाया कि पहले कहा गया था कि आरक्षण में संख्या बढ़ाई जानी चाहिए, फिर इस बार ओबीसी को क्यों शामिल नहीं किया गया। उन्होंने यह भी कहा कि पहले लॉटरी खुले तौर पर होती थी, लेकिन इस बार ST और SC कैटेगरी के लिए ऐसा क्यों नहीं किया गया, यह गंभीर सवाल है।
वहीं, उद्धव गुट के इन आरोपों पर शहरी विकास राज्य मंत्री माधुरी मिसाल ने पलटवार किया है। उन्होंने कहा कि ठाकरे गुट की आपत्तियां किसी नियम या कानूनी आधार पर नहीं थीं। मंत्री के मुताबिक, केवल राजनीतिक दबाव बनाकर मनचाहा रिजर्वेशन नहीं कराया जा सकता। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि ठाकरे गुट की आपत्तियों पर विचार जरूर किया जाएगा, लेकिन लॉटरी प्रक्रिया पूरी तरह नियमों के तहत हुई है।

रिजर्वेशन लिस्ट की बात करें तो
अनुसूचित जाति के लिए कुल 3 सीटें आरक्षित की गई हैं।
ठाणे में SC,
जालना में SC महिला,
और लातूर में SC महिला
अन्य पिछड़ा वर्ग के लिए 8 सीटें,
जबकि सामान्य वर्ग के लिए 17 सीटें आरक्षित की गई हैं।
कुल मिलाकर, मुंबई मेयर रिजर्वेशन को लेकर सियासी घमासान तेज हो गया है। एक तरफ उद्धव ठाकरे गुट इसे सामाजिक न्याय के खिलाफ बता रहा है, तो दूसरी तरफ सरकार इसे नियमों के मुताबिक लिया गया फैसला बता रही है। आने वाले दिनों में यह विवाद और तूल पकड़ सकता है।