
महाराष्ट्र के खाद्य एवं औषधि प्रशासन विभाग से जुड़े कथित रिश्वत कांड में बड़ी प्रशासनिक कार्रवाई की गई है। राज्य के खाद्य एवं औषधि प्रशासन मंत्री नरहरी झिरवाल ने अपने निजी सचिव रामदास गाडे को विभाग से कार्यमुक्त कर दिया है। यह कार्रवाई उस समय हुई जब मंत्रालय में 35 हजार रुपये की रिश्वत लेने के मामले ने तूल पकड़ लिया और एंटी करप्शन ब्यूरो ने एक कर्मचारी को रंगेहाथ गिरफ्तार किया।
जानकारी के अनुसार, राजेंद्र ढेरिंगे नामक कर्मचारी को 35 हजार रुपये की रिश्वत लेते हुए लाचलुचपत प्रतिबंधक विभाग के अधिकारियों ने पकड़ लिया। इस गिरफ्तारी के बाद पूरे मंत्रालय में हड़कंप मच गया। मामला तब और गंभीर हो गया जब एक स्टिंग ऑपरेशन का वीडियो सामने आया, जिसमें कथित तौर पर फाइलों पर लाल और हरी पट्टियों के जरिए पैसों के लेन-देन का संकेत दिए जाने का दावा किया गया।
स्टिंग करने वाले व्यक्ति ने दावा किया कि विभाग में आने वाली फाइलों पर विशेष निशान लगाकर यह तय किया जाता था कि किस फाइल के लिए कितनी रकम ली जानी है। इतना ही नहीं, मेडिकल सस्पेंशन से जुड़ी सुनवाई मंत्री स्वयं नहीं बल्कि उनके अधीनस्थ अधिकारी करते थे, और बिना पैसे के काम न होने का भी आरोप लगाया गया।
इन गंभीर आरोपों के बाद मंत्री नरहरी झिरवाल ने तत्काल कदम उठाते हुए अपने निजी सचिव रामदास गाडे को खाद्य एवं औषधि प्रशासन विभाग से हटाकर उनके मूल पशु चिकित्सा विभाग में वापस भेजने के आदेश जारी किए हैं।
फिलहाल इस पूरे प्रकरण ने राजनीतिक और प्रशासनिक गलियारों में हलचल तेज कर दी है। अब सबकी नजर इस बात पर टिकी है कि जांच किस दिशा में आगे बढ़ती है और क्या इस मामले में और भी बड़े नाम सामने आते हैं।