नई दिल्ली में महाबोधी महाविहार को बौद्ध समुदाय के हवाले करने की मांग को लेकर बड़ा आंदोलन देखने को मिला। राजधानी के जंतर-मंतर पर देशभर से आए हजारों बौद्ध अनुयायियों ने विराट मार्च निकालकर 1949 के बीटी एक्ट को रद्द करने की मांग की। प्रदर्शन में केंद्रीय सामाजिक न्याय राज्यमंत्री और रिपब्लिकन पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष रामदास आठवले भी शामिल हुए और आंदोलन को अपना समर्थन दिया।

रामदास आठवले ने कहा कि महाबोधी महाविहार बौद्धों का सर्वोच्च आस्था केंद्र है और इसका प्रबंधन पूरी तरह बौद्ध समाज के हाथों में होना चाहिए। उन्होंने मांग की कि महाबोधी मंदिर प्रबंधन समिति में अध्यक्ष समेत सभी सदस्य बौद्ध समुदाय से हों। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि भले ही वे सरकार का हिस्सा हैं, लेकिन बौद्ध समाज के सवाल पर वे समाज के साथ खड़े हैं।

आठवले ने ऐलान किया कि इस संबंध में प्रधानमंत्री को ज्ञापन सौंपा जाएगा और उनसे आग्रह किया जाएगा कि वे बिहार सरकार को बीटी एक्ट रद्द करने का निर्देश दें।
गौरतलब है कि बिहार के बोधगया स्थित महाबोधि टेंपल को बौद्ध धर्म का सबसे पवित्र स्थल माना जाता है। आंदोलन का नेतृत्व भंते विनाचार्य ने किया, जबकि विभिन्न दलों के बौद्ध नेता और जनप्रतिनिधि भी बड़ी संख्या में मौजूद रहे। प्रदर्शनकारियों ने एक स्वर में मांग दोहराई कि महाबोधी महाविहार का प्रबंधन पूरी तरह बौद्ध समुदाय को सौंपा जाए।
इस आंदोलन के बाद अब केंद्र और बिहार सरकार की प्रतिक्रिया पर सबकी नजरें टिकी हैं।