मुंबई:राष्ट्रवादी कांग्रेस शरदचंद्र पवार गुट के प्रदेशाध्यक्ष शशिकांत शिंदे ने पार्टी के संभावित विलीनीकरण को लेकर चल रही अटकलों पर साफ शब्दों में विराम लगा दिया है। मुंबई में पत्रकारों से बातचीत करते हुए शिंदे ने कहा कि अब इस मुद्दे पर अगर-मगर की चर्चा का कोई अर्थ नहीं रह गया है, क्योंकि जिस नेतृत्व के साथ यह चर्चा होनी थी, वह अब मौजूद नहीं है।
शिंदे ने कहा कि विलीनीकरण को लेकर कई नेताओं ने अपनी-अपनी भावनाएं व्यक्त की थीं और तय हुआ था कि चुनाव के बाद इस पर अंतिम निर्णय लिया जाएगा। विलीनीकरण का स्वरूप क्या होगा, यह भी आपसी चर्चा से तय किया जाना था। लेकिन अब परिस्थितियां बदल चुकी हैं, इसलिए इस विषय पर आगे कोई टिप्पणी नहीं की जाएगी।
उन्होंने स्पष्ट किया कि यह धारणा गलत है कि उनकी पार्टी विलीनीकरण के पीछे पड़ी हुई थी। शिंदे के मुताबिक, दिवंगत ‘दादा’ के रहते दोनों पक्षों के एकत्रीकरण को लेकर निर्णय हुआ था और उसी संदर्भ में बातचीत चल रही थी। उनके निधन के बाद केवल सच और तथ्य सामने रखे गए, वह भी शपथपूर्वक। इसके बाद इस मुद्दे पर उन्होंने स्वयं कभी चर्चा नहीं की।

शिंदे ने कहा कि पार्टी की ओर से सिर्फ इतना कहा गया था कि दिवंगत नेता की इच्छा पूरी होनी चाहिए, लेकिन अब यह तय कर लिया गया है कि इस विषय को यहीं समाप्त किया जाए। पार्टी अब पूरी ताकत के साथ संगठन को फिर से मजबूत करने पर ध्यान दे रही है।
विलीनीकरण को लेकर प्रफुल्ल पटेल और सुनील तटकरे की कथित आपत्तियों के सवाल पर शिंदे ने टिप्पणी करने से इनकार कर दिया। उन्होंने कहा कि इस मुद्दे पर संबंधित नेताओं को ही अपनी भूमिका स्पष्ट करनी चाहिए और किसी और के लिए उनकी ओर से बोलना उचित नहीं होगा।
अजित पवार को लेकर पहले दिए गए बयान पर सफाई देते हुए शिंदे ने कहा कि यदि उन्होंने कभी यह कहा हो कि अजित पवार से कोई गलती हुई, तो वह अपने शब्द वापस लेते हैं। शिंदे के अनुसार, अजित पवार उस समय भावनात्मक स्थिति में थे और पार्टी में हुए विभाजन को सुधारना चाहते थे। यह निर्णय जिला परिषद चुनावों के नतीजों के बाद लिया जाना था, लेकिन अब बीते समय की बातों पर चर्चा करना उचित नहीं है।
शिंदे ने अंत में दोहराया कि राष्ट्रवादी कांग्रेस शरदचंद्र पवार गुट अब विलीनीकरण की बहस से बाहर निकलकर संगठन विस्तार और राजनीतिक मजबूती पर फोकस करेगा।