Home mumbaiचर्नी रोड-गिरगांव पुल पर घमासान, सैफी हॉस्पिटल के खिलाफ सड़क पर उतरे लोग; मंत्री मंगलप्रभात लोढा बोले पुल बनकर रहेगा

चर्नी रोड-गिरगांव पुल पर घमासान, सैफी हॉस्पिटल के खिलाफ सड़क पर उतरे लोग; मंत्री मंगलप्रभात लोढा बोले पुल बनकर रहेगा

by ashishppandya90@gmail.com
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मुंबई के चर्नी रोड- गिरगांव पुल को लेकर विवाद एक बार फिर तेज हो गया है। पुल निर्माण का विरोध कर रहे Saifee Hospital प्रबंधन के खिलाफ आज स्थानीय नागरिकों का गुस्सा सड़कों पर दिखाई दिया..गिरगांव पुल बचाव समिति और मंगलवाड़ी- केळेवाड़ी निवासी संघ के नेतृत्व में सैफी हॉस्पिटल के गेट के सामने जोरदार प्रदर्शन किया गया।


इस आंदोलन में महाराष्ट्र सरकार के कैबिनेट मंत्री मंगल प्रभात लोढ़ा भी शामिल हुए। मंत्री लोढा ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि गिरगांवकरों के अधिकारों से कोई समझौता नहीं होगा और पुल का निर्माण हर हाल में पूरा कराया जाएगा। उन्होंने आरोप लगाया कि पिछले चार वर्षों से सैफी हॉस्पिटल प्रबंधन की आपत्तियों के कारण पुल का काम बाधित रहा है, जिससे आम जनता को भारी परेशानी उठानी पड़ रही है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि चर्नी रोड और गिरगांव को जोड़ने वाले इस पुल के अभाव में रोजाना हजारों नागरिकों को लंबा रास्ता तय करना पड़ता है। पुल बचाव समिति के पदाधिकारियों के मुताबिक, इस इलाके में अब तक कई हादसे हो चुके हैं, जिनमें दो लोगों की जान भी जा चुकी है।

करीब डेढ़ साल पहले न्यायालय के आदेश के बाद बीएमसी ने पुल निर्माण कार्य शुरू किया था और लगभग 60 प्रतिशत काम पूरा भी हो चुका था। लेकिन आरोप है कि सैफी हॉस्पिटल प्रबंधन की नई आपत्तियों के चलते निर्माण कार्य फिर रुक गया।
मंत्री लोढा ने बताया कि वे पिछले तीन वर्षों से प्रशासनिक स्तर पर लगातार प्रयास कर रहे हैं। मुंबई महानगरपालिका ने पुल को मंजूरी देने के साथ निधि भी स्वीकृत की है। बावजूद इसके, कानूनी अड़चनों और विरोध के कारण परियोजना अधर में लटकी हुई है।


आंदोलन में नगरसेविका श्रीमती स्नेहल तेंडुलकर, श्री गौरांग झवेरी, श्री रवी सानप के साथ पुल बचाव समिति के शैलेश पोद्दार, दीपक तळेकर और गौरव शर्मा सहित बड़ी संख्या में स्थानीय नागरिक मौजूद रहे।
फिलहाल, गिरगांवकरों ने साफ कर दिया है कि जब तक पुल निर्माण दोबारा शुरू नहीं होता, उनका आंदोलन जारी रहेगा। अब सभी की निगाहें प्रशासन और सैफी हॉस्पिटल प्रबंधन की अगली पहल पर टिकी हैं।

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