छत्रपति शिवाजी महाराज के ऐतिहासिक गौरव को वैश्विक पहचान मिल गई है। शिवाजी महाराज के कालखंड के 12 प्रमुख किलों को संयुक्त राष्ट्र शैक्षिक, वैज्ञानिक एवं सांस्कृतिक संगठन UNESCO ने विश्व धरोहर स्थलों की सूची में शामिल किया है। ‘मराठा मिलिट्री लैंडस्केप्स ऑफ इंडिया’ शीर्षक के अंतर्गत इन किलों को यह मान्यता 11 जुलाई 2025 को आयोजित 47वें अधिवेशन में प्रदान की गई थी।

फ्रांस की राजधानी पेरिस स्थित यूनेस्को मुख्यालय में महाराष्ट्र के सांस्कृतिक कार्य एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री आशीष शेलार ने आधिकारिक प्रमाणपत्र स्वीकार किया। इस अवसर को महाराष्ट्र और देश के लिए ऐतिहासिक एवं गौरवपूर्ण क्षण बताया गया।
विश्व धरोहर का दर्जा पाने वाले किलों में रायगढ़, राजगढ़, प्रतापगढ़, पन्हाला, शिवनेरी, लोहगढ़, साल्हेर, सिंधुदुर्ग, सुवर्णदुर्ग, विजयदुर्ग, खांदेरी तथा तमिलनाडु स्थित जिंजी किला शामिल हैं। ये किले छत्रपति शिवाजी महाराज द्वारा स्थापित हिंदवी स्वराज्य की सैन्य रणनीति, प्रशासनिक दूरदर्शिता और जनकल्याणकारी शासन व्यवस्था के प्रतीक माने जाते हैं। इतिहासकारों के अनुसार इन दुर्गों ने मराठा साम्राज्य को सुदृढ़ आधार प्रदान किया और विदेशी आक्रमणों के विरुद्ध प्रभावी रक्षा तंत्र स्थापित किया।

मंत्री शेलार ने इस उपलब्धि के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के मार्गदर्शन का उल्लेख करते हुए आभार व्यक्त किया। साथ ही उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे और सुनेत्रा पवार सहित प्रतिनिधिमंडल के सदस्यों के प्रयासों की भी सराहना की।

यूनेस्को मुख्यालय में मंत्री शेलार ने भारत रत्न डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर की स्थापित प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित कर श्रद्धांजलि दी। उल्लेखनीय है कि संविधान के 75 वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर महाराष्ट्र सरकार ने यह अर्धप्रतिमा यूनेस्को को भेंट की थी, जिसकी स्थापना 26 नवंबर 2025 को संविधान दिवस के दिन पेरिस में की गई थी।
इस मान्यता के साथ शिवाजी महाराज की विरासत को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान मिली है। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे न केवल ऐतिहासिक धरोहरों के संरक्षण को बल मिलेगा, बल्कि सांस्कृतिक पर्यटन को भी प्रोत्साहन प्राप्त होगा। यह उपलब्धि महाराष्ट्र, भारत और शिवभक्तों के लिए गर्व का विषय मानी जा रही है।