नई दिल्ली से बड़ी खबर सामने आ रही है। राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी शरदचंद्र पवार गुट की कार्याध्यक्ष और सांसद सुप्रिया सुले ने दादा के अधूरे सपनों को पूरा करने की बात कहते हुए भावुक बयान दिया है।
दिल्ली में मीडिया से बातचीत करते हुए सुप्रिया सुले ने कहा कि उनका परिवार इस समय बेहद कठिन दौर से गुजर रहा है। उन्होंने कहा कि आज दादा हमारे बीच नहीं हैं, इसलिए वे पुरानी बातों को नहीं उठाना चाहतीं। उन्होंने साफ कहा कि उनके और दादा के बीच जो भी चर्चा हुई, वह निजी थी। लेकिन दादा के अधूरे सपनों को पूरा करना अब हम सबकी नैतिक जिम्मेदारी है।

मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के बयान का जिक्र करते हुए सुप्रिया सुले ने कहा कि मुख्यमंत्री ने इस पूरे मामले की विस्तृत जांच का आश्वासन दिया है। रोहित की बेचैनी स्वाभाविक है, क्योंकि कई सवाल हैं जिनके जवाब अभी तक नहीं मिले हैं। क्या हुआ, कैसे हुआ, क्या उन्हें बचाया जा सकता था—ये सवाल मन में उठ रहे हैं। उन्होंने कहा कि अब सभी को जांच रिपोर्ट का इंतजार करना चाहिए।
सुप्रिया सुले ने यह भी बताया कि जब आदरणीय शरदचंद्र पवार साहब अस्पताल में थे, तब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, सोनिया गांधी, राहुल गांधी, राजनाथ सिंह और उमर अब्दुल्ला समेत कई नेताओं ने फोन कर उनके स्वास्थ्य की जानकारी ली। इस कठिन समय में सभी ने पवार परिवार का साथ दिया, जिसके लिए उन्होंने सभी का आभार व्यक्त किया।
रेवती और सारंग की शादी को लेकर चल रही चर्चाओं पर भी सुप्रिया सुले ने प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि पिछले कई महीनों से यह बातचीत चल रही थी और दोनों एक-दूसरे को पिछले एक साल से जानते हैं। उन्होंने बताया कि परिवार के सभी भाइयों ने इस रिश्ते को आशीर्वाद दिया था। यह शादी दादा के जीवनकाल में ही तय हो गई थी और 30 जनवरी को परिवार इसकी आधिकारिक घोषणा करने वाला था। लेकिन 28 जनवरी को दादा के निधन के कारण माहौल बदल गया। उन्होंने संतोष जताया कि यह रिश्ता दादा के आशीर्वाद से तय हुआ।

कृषि और ट्रेड डील के मुद्दे पर भी सुप्रिया सुले ने केंद्र सरकार से पारदर्शिता की मांग की। उन्होंने कहा कि अगर शेतकऱ्यांचे यानी किसानों का भला होता है तो सभी को खुशी होगी, लेकिन ट्रेड डील से भारत को क्या लाभ मिलेगा, इस पर सरकार को स्पष्ट जानकारी देनी चाहिए।
उन्होंने याद दिलाया कि दादा के समय 500 करोड़ रुपये का बड़ा प्रोजेक्ट कृषि विज्ञान केंद्र के माध्यम से खेती और कृषि आधारित उद्योगों के लिए शुरू किया गया था। पुणे में ‘कृषक’ पहल सफल रही है और यह दादा का सपना था। उन्होंने दोहराया कि इस सपने को आगे बढ़ाना और पूरा करना हम सभी की नैतिक जिम्मेदारी है।