नई दिल्ली। संसद के बजट सत्र के बीच लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को लेकर सियासी संग्राम तेज हो गया है। केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने कांग्रेस सांसदों पर गंभीर आरोप लगाते हुए दावा किया है कि 20 से 25 कांग्रेस सांसद लोकसभा स्पीकर के चेंबर में घुस आए और उनके साथ गाली-गलौच व दुर्व्यवहार किया। रिजिजू ने कहा कि जब यह घटना हुई, तब वह स्वयं मौके पर मौजूद थे।
संसद परिसर में मीडिया से बातचीत करते हुए रिजिजू ने कहा कि स्पीकर ओम बिरला बेहद शांत और नरम स्वभाव के व्यक्ति हैं, अन्यथा इस तरह की घटना पर कड़ी कार्रवाई हो सकती थी। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रियंका गांधी वाड्रा और केसी वेणुगोपाल समेत कांग्रेस के वरिष्ठ नेता भी उस दौरान चेंबर में मौजूद थे और माहौल को और भड़का रहे थे।

यह बयान ऐसे समय में सामने आया है जब विपक्ष ने लोकसभा अध्यक्ष के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव का नोटिस सौंप दिया है। विपक्ष का आरोप है कि ओम बिरला सदन को पक्षपातपूर्ण तरीके से संचालित कर रहे हैं, कांग्रेस सदस्यों पर झूठे आरोप लगा रहे हैं और अपने पद का दुरुपयोग कर रहे हैं। संविधान के अनुच्छेद 94(सी) के तहत यह नोटिस लोकसभा महासचिव उत्पल कुमार सिंह को सौंपा गया है।
सूत्रों के मुताबिक, अविश्वास प्रस्ताव पर कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, द्रमुक समेत कई विपक्षी दलों के 120 से अधिक सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। हालांकि तृणमूल कांग्रेस के सांसदों ने इस प्रस्ताव पर हस्ताक्षर नहीं किए हैं। नोटिस मिलने के बाद लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने निर्णय लिया है कि मामले का निपटारा होने तक वह आसन पर नहीं बैठेंगे। उन्होंने लोकसभा महासचिव को नोटिस की जांच कर नियमों के अनुसार उचित कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं।

इस पूरे घटनाक्रम ने संसद की गरिमा और संसदीय परंपराओं को लेकर नई बहस छेड़ दी है। एक ओर सत्ता पक्ष कांग्रेस पर मर्यादा तोड़ने का आरोप लगा रहा है, तो दूसरी ओर विपक्ष स्पीकर की निष्पक्षता पर सवाल उठा रहा है। अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि नोटिस पर क्या निर्णय होता है और सदन की कार्यवाही आगे किस दिशा में बढ़ती है।