केंद्र सरकार द्वारा स्वच्छ सर्वेक्षण 2025-26 कार्यक्रम की घोषणा कर दी गई है। इस वर्ष स्वच्छ सर्वेक्षण के तहत बृहन्मुंबई महानगरपालिका का प्रदर्शन बेहतर रहे, इसके लिए मुंबई को स्वच्छ और सुंदर बनाए रखने में नागरिकों के सहयोग की आवश्यकता है। यह अपील अतिरिक्त महानगरपालिका आयुक्त (शहर) डॉ. (श्रीमती) अश्विनी जोशी ने की है।
डॉ. अश्विनी जोशी ने कहा कि स्वच्छ सर्वेक्षण में बेहतर रैंकिंग हासिल करने के लिए केवल प्रशासनिक प्रयास ही नहीं, बल्कि नागरिकों की सक्रिय भागीदारी भी बेहद जरूरी है। उन्होंने महानगरपालिका प्रशासन की ओर से मुंबईकरों से आग्रह किया कि वे अपने घर, परिसर और सार्वजनिक स्थानों को स्वच्छ रखें और स्वच्छता अभियानों में सक्रिय रूप से भाग लें।
स्वच्छ सर्वेक्षण के तहत आवश्यक तैयारियों को लेकर बृहन्मुंबई महानगरपालिका मुख्यालय में 2 फरवरी 2026 को एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। इस बैठक में उपायुक्त (घनकचरा प्रबंधन) किरण दिघावकर सहित विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे। बैठक में स्वच्छ सर्वेक्षण की रूपरेखा, मूल्यांकन मानदंड और विभागीय समन्वय पर विस्तार से चर्चा की गई।

डॉ. जोशी ने निर्देश दिए कि घनकचरा प्रबंधन, मलनिस्सारण प्रचालन, मुंबई सांडपाणी विल्हेवाट परियोजना, पर्जन्य जलवाहिनी, शिक्षा विभाग सहित सभी संबंधित विभाग आपसी समन्वय के साथ प्रभावी उपाययोजनाएं लागू करें। साथ ही सर्वेक्षण के मूल्यांकन और रिपोर्टिंग के लिए आवश्यक समग्र, सटीक और अद्यतन जानकारी समय पर संकलित की जाए।
गौरतलब है कि स्वच्छ सर्वेक्षण का आयोजन हर वर्ष केंद्रीय आवास और शहरी कार्य मंत्रालय द्वारा किया जाता है। इसका उद्देश्य शहरों में स्वच्छता, कचरा प्रबंधन और नागरिक सहभागिता का मूल्यांकन कर उनकी रैंकिंग तय करना है। वर्ष 2025-26 स्वच्छ सर्वेक्षण का दसवां संस्करण है, जिसमें स्वच्छता, कचरे का पृथक्करण, संग्रह, परिवहन और प्रसंस्करण जैसे मानकों पर विशेष जोर दिया गया है।
इस वर्ष स्वच्छ सर्वेक्षण की केंद्रीय थीम ‘स्वच्छता की नई पहल बढ़ाए हाथ, करें सफाई साथ’ रखी गई है। इसके तहत नागरिकों के फीडबैक और सत्यापन को अधिक महत्व दिया गया है। वेबसाइट और मोबाइल ऐप के माध्यम से वर्षभर डिजिटल फीडबैक एकत्र किया जाएगा। खुले में शौच और मूत्रत्याग पर रोक को लेकर नए मानक तय किए गए हैं। साथ ही स्कूलों में व्यवहार परिवर्तन कार्यक्रमों पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
डॉ. अश्विनी जोशी ने बताया कि मुंबई जैसे तटीय शहरों के लिए इस बार अलग मूल्यांकन मानदंड लागू किए गए हैं। इसके अलावा पर्यटन, विरासत और धार्मिक स्थलों के साथ-साथ अधिक भीड़-भाड़ वाले सार्वजनिक स्थानों की स्वच्छता पर भी विशेष फोकस किया गया है।
उन्होंने कहा कि बृहन्मुंबई क्षेत्र में घनकचरे का वैज्ञानिक और प्रभावी प्रबंधन सुनिश्चित करने के लिए घनकचरा प्रबंधन विभाग लगातार प्रयासरत है। इन प्रयासों का सही मूल्यांकन स्वच्छ सर्वेक्षण में दिखाई दे, इसके लिए सभी विभागों को मिलकर ठोस कदम उठाने होंगे।
नागरिकों से अपील करते हुए डॉ. जोशी ने कहा कि स्वच्छता बनाए रखने में जनता की भूमिका सबसे अहम है। आवासीय परिसरों में ही कचरे का पृथक्करण और वैज्ञानिक तरीके से निपटान किया जाए। स्वच्छता अभियानों में सक्रिय भागीदारी निभाई जाए और गंदगी फैलाने वालों को हतोत्साहित किया जाए।

उन्होंने यह भी कहा कि स्कूल आधारित स्वच्छता कार्यक्रमों और विद्यार्थियों की भागीदारी से बाल्यावस्था में ही स्वच्छता की आदतें विकसित होंगी, जिससे समाज में दीर्घकालीन और स्थायी व्यवहार परिवर्तन संभव होगा। यही प्रयास मुंबई को स्वच्छ, सुंदर और स्वस्थ शहर बनाने में सहायक सिद्ध होंगे।