मुंबई में सिमेंट कंक्रीट सड़कों की गुणवत्ता, टिकाऊपन और बेहतर राइडिंग क्वालिटी सुनिश्चित करने की दिशा में बृहन्मुंबई महानगरपालिका ने एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। पूर्ण और निर्माणाधीन सिमेंट कंक्रीट सड़कों के मूल्यांकन को लेकर भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान, मुंबई (IIT मुंबई) में एक दिवसीय विचारमंथन कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस कार्यशाला में बृहन्मुंबई महानगरपालिका के 300 से अधिक अभियंताओं ने भाग लेकर सड़क निर्माण के नियोजन, क्रियान्वयन और गुणवत्ता नियंत्रण से जुड़ा तंत्रशुद्ध एवं शास्त्रशुद्ध प्रशिक्षण प्राप्त किया।
महानगरपालिका द्वारा शहर में बड़े पैमाने पर सिमेंट कंक्रीटीकरण कार्य हाथ में लिए गए हैं। इन कार्यों की गुणवत्ता अत्युच्च और सर्वोत्तम दर्जे की बनी रहे, इसके लिए प्रशासन निरंतर विभिन्न उपाय लागू कर रहा है। इसी क्रम में यह कार्यशाला आयोजित की गई, जिसमें आधुनिक तकनीक के उपयोग, सड़क निर्माण के दौरान किए जाने वाले कार्य और ‘डू एंड डोंट्स’, साथ ही प्रत्यक्ष कार्यस्थल पर काम कर रहे अनुभवी अभियंताओं की शंकाओं के समाधान पर विशेष जोर दिया गया। इस कार्यशाला में गुणवत्ता निरीक्षण संस्था (QMA) और ठेकेदार संस्थाओं के प्रतिनिधियों की भी उपस्थिति रही।

कार्यशाला का उद्घाटन IIT मुंबई के स्थापत्य अभियांत्रिकी विभाग के वरिष्ठ विशेषज्ञ प्रो. डॉ. के. वी. कृष्ण राव के मार्गदर्शनपरक भाषण से हुआ। उन्होंने तृतीय पक्ष लेखा परीक्षण के महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि व्यवहारिक दृष्टिकोण और क्षेत्रीय अनुभवों पर आधारित तकनीकी सहयोग से मुंबई की सड़क अवसंरचना को अधिक मजबूत, टिकाऊ और गुणवत्तापूर्ण बनाया जा सकता है।
अतिरिक्त महानगरपालिका आयुक्त (प्रकल्प) अभिजीत बांगर ने बताया कि अक्टूबर 2023 में शुरू हुए सिमेंट कंक्रीटीकरण कार्यक्रम के तहत अब तक लगभग 60 प्रतिशत कार्य पूर्ण हो चुका है, जबकि शेष कार्य विभिन्न चुनौतियों के बावजूद प्रगति पर है। उन्होंने कहा कि अत्यधिक जनसंख्या घनत्व और घनी शहरी संरचना के कारण यह परियोजना बेहद चुनौतीपूर्ण है, फिर भी सुनियोजित तरीके से इसे प्रभावी रूप से लागू किया जा रहा है। उन्होंने अभियंताओं की प्रत्यक्ष कार्यस्थल पर उपस्थिति को अनिवार्य बताते हुए कहा कि राइडिंग क्वालिटी और सड़क के किनारे सेवा वाहिनियों का समुचित उपयोग इस परियोजना के दो अत्यंत महत्वपूर्ण पहलू हैं। बेहतर राइडिंग क्वालिटी से सड़कों का जीवनकाल बढ़ता है और रखरखाव लागत में कमी आती है। साथ ही, सेवा वाहिनियों के अधिकतम उपयोग से बार-बार सड़क खुदाई की समस्या पर भी रोक लगेगी।

कार्यशाला के दौरान स्थल निरीक्षण और तकनीकी परीक्षणों पर आधारित चर्चाएं की गईं। गुणवत्ता नियंत्रण और गुणवत्ता आश्वासन (QC/QA), सभी हितधारकों के बीच समन्वय और सिमेंट सड़कों की दीर्घकालिक टिकाऊ क्षमता पर विशेष ध्यान केंद्रित किया गया। प्रो. के. वी. कृष्ण राव और प्रो. सोलोमन देब्बार्मा ने गुणवत्तापूर्ण कंक्रीट मिश्रण, आरएमसी प्लांट से कार्यस्थल तक परिवहन की आदर्श प्रक्रिया, कंक्रीट डालने के दौरान सावधानियां,
जॉइंट कटिंग, क्योरिंग, और कार्य पूर्ण होने के बाद थर्मोप्लास्ट व कैट आईज जैसे सुरक्षा उपायों पर विस्तृत मार्गदर्शन दिया। इसके साथ ही, पेड़ों के तनों के चारों ओर सुरक्षात्मक जाली के उपयोग से फुटपाथ पर पैदल यात्रियों के लिए अतिरिक्त स्थान उपलब्ध कराने के सुझाव भी दिए गए।
इस अवसर पर उप आयुक्त (पायाभूत सुविधा) गिरीश निकम, प्रमुख अभियंता (सड़क एवं यातायात) मंतय्या स्वामी सहित अनेक वरिष्ठ अधिकारी, अभियंता और संबंधित संस्थाओं के प्रतिनिधि उपस्थित रहे।