Home वेब स्टोरीजपवन कल्याण के बेटे अकिरा नंदन पर बनी AI फिल्म पर दिल्ली हाई कोर्ट की रोक, 72 घंटे में इंटरनेट से कंटेंट हटाने का आदेश

पवन कल्याण के बेटे अकिरा नंदन पर बनी AI फिल्म पर दिल्ली हाई कोर्ट की रोक, 72 घंटे में इंटरनेट से कंटेंट हटाने का आदेश

by ashishppandya90@gmail.com
0 comments

नई दिल्ली: दिल्ली हाई कोर्ट ने आंध्र प्रदेश के उपमुख्यमंत्री और अभिनेता पवन कल्याण के बेटे अकिरा नंदन की पहचान, छवि और व्यक्तित्व के कथित दुरुपयोग से जुड़े एक अहम मामले में सख्त रुख अपनाया है। कोर्ट ने अकिरा नंदन को मुख्य भूमिका में दिखाकर बनाई गई एक AI-जनरेटेड फिल्म के प्रसारण और प्रसार पर तत्काल रोक लगा दी है।

न्यायमूर्ति तुषार ताओ गडेला ने अकिरा नंदन उर्फ अकिरा देसाई द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए यह आदेश पारित किया। याचिका में आरोप लगाया गया था कि सांभवामी स्टूडियोज एलएलपी ने यूट्यूब पर लगभग एक घंटे की एक AI फिल्म अपलोड की, जिसे “दुनिया की पहली ग्लोबल AI फिल्म” बताया गया, जबकि इसके लिए अकिरा नंदन या उनके अभिभावकों से किसी भी प्रकार की अनुमति नहीं ली गई थी।

याचिकाकर्ता का कहना था कि फिल्म में अकिरा नंदन से जुड़े गढ़े हुए अंतरंग और रोमांटिक दृश्य दिखाए गए हैं, जिससे उनकी निजता, प्रतिष्ठा और व्यक्तित्व अधिकारों को गंभीर नुकसान पहुंचा है। कोर्ट ने प्रथम दृष्टया माना कि इस तरह का कंटेंट न केवल वादी की छवि और नाम को अपूरणीय क्षति पहुंचा सकता है, बल्कि उनके व्यक्तित्व से जुड़े कॉपीराइट, नैतिक अधिकार और प्रचार अधिकारों का भी उल्लंघन करता है।

अदालत ने टिप्पणी की कि एआई और डीपफेक तकनीक के कथित दुरुपयोग के जरिए किसी व्यक्ति को मुख्य भूमिका में दिखाकर फिल्म बनाना उसके नाम, छवि, आवाज और व्यक्तित्व के व्यावसायिक शोषण की ओर इशारा करता है। कोर्ट ने कहा कि यदि समय रहते रोक नहीं लगाई गई, तो वादी को होने वाली क्षति की भरपाई केवल पैसों से संभव नहीं होगी।

इसके बाद हाई कोर्ट ने एकतरफा अंतरिम राहत देते हुए फिल्म और उससे जुड़े सभी ऑनलाइन कंटेंट को तुरंत हटाने का आदेश दिया। साथ ही प्रतिवादियों को अकिरा नंदन के नाम, छवि, आवाज, हाव-भाव या किसी भी पहचान योग्य विशेषता का AI, जनरेटिव AI, मशीन लर्निंग या डीपफेक तकनीक के जरिए उपयोग करने से रोक दिया गया है।

कोर्ट ने यह भी निर्देश दिया कि फिल्म से जुड़े क्लिप्स, शॉर्ट्स और प्रचार सामग्री को सभी वेबसाइट्स और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स से हटाया जाए। मेटा प्लेटफॉर्म्स को आदेश दिया गया है कि वह 72 घंटे के भीतर उल्लंघन करने वाले यूआरएल्स हटाने के लिए संबंधित यूजर को सूचित करे, और यदि यूजर ऐसा नहीं करता है तो प्लेटफॉर्म स्वयं कंटेंट हटाए। मामले की अगली सुनवाई 5 फरवरी को निर्धारित की गई है।

You may also like

Leave a Comment