Home देशमहाराष्ट्र की 29 महानगरपालिकाओं में मेयर आरक्षण तय, कल्याण-डोंबिवली में ST तो ठाणे में SC महापौर, 17 शहरों में महिला मेयर

महाराष्ट्र की 29 महानगरपालिकाओं में मेयर आरक्षण तय, कल्याण-डोंबिवली में ST तो ठाणे में SC महापौर, 17 शहरों में महिला मेयर

by ashishppandya90@gmail.com
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महाराष्ट्र की राजनीति में नगर निगम चुनावों के बाद अब महापौर की कुर्सी को लेकर तस्वीर पूरी तरह साफ हो गई है। गुरुवार, 22 जनवरी को मुंबई स्थित मंत्रालय में आयोजित आरक्षण लॉटरी प्रक्रिया के जरिए राज्य की 29 महानगरपालिकाओं के मेयर पद के लिए आरक्षण की आधिकारिक घोषणा कर दी गई। इस लॉटरी के साथ ही यह तय हो गया कि किस शहर का नेतृत्व किस वर्ग और किस श्रेणी के प्रतिनिधि के हाथों में होगा।

राज्य सरकार की ओर से जारी जानकारी के मुताबिक, 29 में से 16 महानगरपालिकाओं में मेयर पद विभिन्न आरक्षित श्रेणियों के लिए तय किया गया है, जबकि 13 महानगरपालिकाओं में यह पद सामान्य वर्ग के लिए खुला रहेगा। खास बात यह रही कि इस बार महिला आरक्षण का असर साफ तौर पर दिखाई दिया। कुल 29 में से 17 महानगरपालिकाओं में महिला मेयर चुनी जाएंगी, जिससे शहरी राजनीति में महिलाओं की भागीदारी और मजबूत होने जा रही है।

कल्याण-डोंबिवली में ST, ठाणे में SC महापौर

आरक्षण लॉटरी में सबसे अहम फैसला कल्याण-डोंबिवली महानगरपालिका को लेकर सामने आया। यहां मेयर पद अनुसूचित जनजाति (ST) वर्ग के लिए आरक्षित किया गया है। जैसे ही KDMC का नाम ST आरक्षण की पर्ची में निकला, शहर की सियासत में हलचल तेज हो गई। अब सभी राजनीतिक दलों की नजरें अनुसूचित जनजाति वर्ग के मजबूत और प्रभावशाली चेहरों पर टिक गई हैं, क्योंकि अगले कार्यकाल में शहर का प्रथम नागरिक इसी वर्ग से होगा।

वहीं ठाणे महानगरपालिका में इस बार अनुसूचित जाति (SC) वर्ग को मेयर पद मिला है। ठाणे जैसे बड़े और राजनीतिक रूप से अहम शहर में SC आरक्षण के चलते दलों की रणनीतियों में बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। यहां भी संभावित उम्मीदवारों को लेकर अंदरखाने मंथन तेज हो चुका है।

रोटेशन पद्धति से तय हुआ आरक्षण

शहरी विकास विभाग की मौजूदगी में पूरी प्रक्रिया रोटेशन पद्धति के आधार पर पारदर्शी तरीके से पूरी की गई। अधिकारियों ने एक-एक कर पर्चियां निकालकर यह तय किया कि कौन सा शहर किस श्रेणी में जाएगा। इस दौरान मुंबई की बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC), पुणे, नागपुर, नासिक और औरंगाबाद जैसी बड़ी महानगरपालिकाओं पर सभी की खास नजर बनी रही।

नियमों के अनुसार, जिन शहरों में पिछले कार्यकाल में सामान्य वर्ग का मेयर था, वहां इस बार आरक्षित वर्ग को प्राथमिकता दी गई है। इसी रोटेशन सिस्टम के चलते कई नगर निगमों में राजनीतिक समीकरण पूरी तरह बदलते नजर आ रहे हैं।

महिला आरक्षण ने बिगाड़ा दिग्गजों का गणित

इस बार 50 प्रतिशत महिला आरक्षण ने कई बड़े नेताओं की योजनाओं पर पानी फेर दिया है। 17 महानगरपालिकाओं में महिला मेयर तय होने के बाद राजनीतिक दलों को मजबूरी में महिला नेतृत्व को आगे लाना पड़ेगा। खासकर मुंबई और पुणे जैसे शहरों में यह सवाल चर्चा में है कि मेयर पद महिला किस श्रेणी में जाएगा और किस दल को इसका सबसे ज्यादा फायदा मिलेगा।

मेयर चुनाव पर सीधा असर

आरक्षण लॉटरी का सीधा असर आगामी सात दिनों में होने वाले मेयर चुनावों पर पड़ेगा। अब तस्वीर साफ होने के बाद राजनीतिक दल उम्मीदवारों के चयन में जुट गए हैं। गठबंधन, समर्थन और समीकरणों का दौर तेज हो चुका है। साफ है कि महाराष्ट्र की शहरी राजनीति में आने वाला हफ्ता बेहद अहम रहने वाला है, जहां मेयर की कुर्सी को लेकर सियासी घमासान देखने को मिलेगा।

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