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ट्रंप का नया नक्शा, नई सनक! कनाडा, वेनेजुएला और ग्रीनलैंड को बताया अमेरिका का हिस्सा, फ्रांसीसी राष्ट्रपति की निजी चैट भी की सार्वजनिक

by ashishppandya90@gmail.com
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वॉशिंगटन से एक बार फिर अमेरिकी राजनीति और वैश्विक कूटनीति को झकझोर देने वाला घटनाक्रम सामने आया है। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म Truth पर एक नया मानचित्र जारी किया है, जिसमें कनाडा, वेनेजुएला और ग्रीनलैंड को अमेरिका का हिस्सा दिखाया गया है। यह कदम न सिर्फ अंतरराष्ट्रीय कानून और संप्रभुता की मूल भावना पर सवाल खड़ा करता है, बल्कि अमेरिका की विदेश नीति को लेकर भी गंभीर चिंताएं पैदा करता है।

डोनाल्ड ट्रंप इससे पहले भी कनाडा को बार-बार अमेरिका का 51वां राज्य कह चुके हैं। पूर्व प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो के कार्यकाल के दौरान सार्वजनिक रूप से दिया गया यह बयान अब एक बार फिर चर्चा में है। नए नक्शे में कनाडा को अमेरिका का हिस्सा दिखाना मौजूदा कनाडाई प्रधानमंत्री मार्क कार्नी के हालिया चीन दौरे से जोड़कर देखा जा रहा है। कार्नी ने बीजिंग जाकर चीन के साथ नए सिरे से रिश्ते बनाने की बात कही थी, जिसे ट्रंप की नाराज़गी की बड़ी वजह माना जा रहा है।

राष्ट्रपति बनते ही ट्रंप ने कनाडा पर भारी टैरिफ लगाए थे। आर्थिक दबाव से जूझ रहा कनाडा अब नए व्यापारिक साझेदार तलाश रहा है। इसी क्रम में भारत के साथ रिश्ते सुधारने और ट्रेड डील पर बातचीत की खबरें भी सामने आई हैं।

इस पूरे घटनाक्रम में वेनेजुएला को लेकर ट्रंप का रुख भी बेहद आक्रामक रहा है। उन्होंने वेनेजुएला को भी अमेरिका का हिस्सा बताया है। ट्रंप प्रशासन के आदेश पर इसी महीने की शुरुआत में वेनेजुएला पर सैन्य कार्रवाई और वहां के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो की गिरफ्तारी का दावा भी किया गया है, जिसने लैटिन अमेरिका में तनाव को और बढ़ा दिया है।

सबसे चौंकाने वाला कदम तब सामने आया, जब डोनाल्ड ट्रंप ने फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों का एक निजी संदेश सोशल मीडिया पर सार्वजनिक कर दिया। इस मैसेज में मैक्रों ग्रीनलैंड, ईरान, सीरिया और रूस जैसे संवेदनशील मुद्दों पर चर्चा कर रहे हैं। कूटनीतिक दुनिया में निजी संवाद को सार्वजनिक करना गंभीर उल्लंघन माना जाता है और इससे अमेरिका के सहयोगी देशों में नाराज़गी खुलकर सामने आ सकती है।

ग्रीनलैंड को लेकर ट्रंप का रुख लगातार सख्त होता जा रहा है। वह दावा करते रहे हैं कि चीन और रूस के खतरे से बचाने के लिए ग्रीनलैंड को अमेरिका का हिस्सा होना चाहिए। ट्रंप ने यहां तक कह दिया है कि जरूरत पड़ी तो बल प्रयोग से भी पीछे नहीं हटेंगे। उन्होंने यूरोपीय देशों को चेतावनी दी है कि अगर ग्रीनलैंड पर अमेरिकी नियंत्रण का विरोध किया गया, तो 100 प्रतिशत तक टैरिफ लगाया जाएगा।

यूरोप के कई देश इस धमकी के खिलाफ एकजुट होते नजर आ रहे हैं। डेनमार्क ने साफ कहा है कि ग्रीनलैंड की संप्रभुता पर कोई समझौता नहीं होगा, जबकि ब्रिटेन और अन्य नाटो देशों ने भी यही दोहराया है कि ग्रीनलैंड का भविष्य केवल वहां के लोगों और डेनमार्क को तय करना है।

ट्रंप ने यह भी ऐलान किया है कि 1 फरवरी से ब्रिटेन से अमेरिका आने वाले सभी सामानों पर 10 प्रतिशत टैरिफ लगाया जाएगा, जो जून से बढ़कर 25 प्रतिशत हो जाएगा। यह टैरिफ तब तक लागू रहेगा, जब तक ग्रीनलैंड को लेकर कोई सौदा नहीं होता। यही नीति डेनमार्क, फ्रांस, जर्मनी, नॉर्वे, स्वीडन और अन्य नाटो सहयोगी देशों पर भी लागू करने की धमकी दी गई है।

कुल मिलाकर डोनाल्ड ट्रंप का नया नक्शा सिर्फ एक तस्वीर नहीं, बल्कि वैश्विक राजनीति में बढ़ती अनिश्चितता और टकराव का संकेत है। सहयोगी देशों के साथ टैरिफ युद्ध, संप्रभुता पर सवाल और कूटनीतिक मर्यादाओं का उल्लंघन ये सब मिलकर दुनिया को एक बार फिर अस्थिरता की ओर धकेलते नजर आ रहे हैं।

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