Home देशकांग्रेस की लापरवाही से मुंबई में वंचित को नुकसान, अंदरूनी गुटबाजी बनी हार की वजह: सिद्धार्थ मोकळे

कांग्रेस की लापरवाही से मुंबई में वंचित को नुकसान, अंदरूनी गुटबाजी बनी हार की वजह: सिद्धार्थ मोकळे

by ashishppandya90@gmail.com
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मुंबई महानगरपालिका चुनाव के नतीजों के बाद वंचित बहुजन आघाड़ी ने कांग्रेस पर तीखा हमला बोला है। वंचित के प्रदेश उपाध्यक्ष और मुख्य प्रवक्ता सिद्धार्थ मोकळे ने मुंबई में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि कांग्रेस की राजनीतिक लापरवाही, कमजोर समन्वय और अंदरूनी गुटबाजी के कारण मुंबई में वंचित बहुजन आघाड़ी को भारी नुकसान उठाना पड़ा है।

सिद्धार्थ मोकळे ने आरोप लगाया कि महानगरपालिका चुनाव से पहले कांग्रेस को बार-बार चेताया गया था कि अल्पसंख्यक मतदाताओं को हल्के में न लिया जाए, लेकिन कांग्रेस नेतृत्व ने इस पर कोई गंभीर प्रयास नहीं किया। नतीजतन, मुंबई में मुस्लिम मतदाता कांग्रेस से दूर होते गए और इसका सीधा असर गठबंधन पर पड़ा।

उन्होंने कहा कि वंचित बहुजन आघाड़ी ने गठबंधन धर्म का पूरी ईमानदारी से पालन किया और आखिरी दम तक कांग्रेस उम्मीदवारों के पक्ष में काम किया, जिससे कांग्रेस को कई जगह फायदा भी हुआ। लेकिन कांग्रेस की ओर से वंचित को वैसा सहयोग नहीं मिला। मोकळे के मुताबिक, मुंबई में वंचित की 15 से 20 सीटें ऐसी थीं, जहां जीत लगभग तय थी, लेकिन कांग्रेस की अंदरूनी राजनीति और मतदाताओं को संभालने में विफलता के चलते वंचित को इन सीटों का नुकसान हुआ।

कांग्रेस पर गंभीर आरोप लगाते हुए मोकळे ने कहा कि कई वार्डों में कांग्रेस के ही कुछ नेताओं और कार्यकर्ताओं ने अपक्ष या अन्य दलों के उम्मीदवारों को छुपा समर्थन दिया, जिससे गठबंधन उम्मीदवारों की हार हुई। उन्होंने कहा कि अगर लातूर और नांदेड की तरह मुंबई में भी कांग्रेस ने समन्वय दिखाया होता, तो चुनावी नतीजे बिल्कुल अलग होते।

इसके साथ ही सिद्धार्थ मोकळे ने औरंगाबाद के चुनाव परिणामों पर भी सवाल खड़े किए। उन्होंने आरोप लगाया कि मतगणना के अंतिम चरण में बंद पड़ी एक मशीन को दोबारा लाकर उसमें हेरफेर किया गया, जिसके कारण आघाड़ी से आगे चल रहे चार उम्मीदवारों को तकनीकी आधार पर पराजित घोषित किया गया।

मोकळे ने साफ कहा कि जहां-जहां कांग्रेस ने वंचित के साथ ईमानदारी दिखाई, वहां दोनों दलों को फायदा हुआ, लेकिन जहां ऐसा नहीं हुआ, वहां दोनों को नुकसान उठाना पड़ा, जिसका सबसे बड़ा खामियाजा वंचित बहुजन आघाड़ी को भुगतना पड़ा।

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