मुंबई से बड़ी राजनीतिक खबर है, जहां महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री और शिवसेना के प्रमुख नेता एकनाथ शिंदे ने उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे पर जोरदार हमला बोला है। मुंबई में आयोजित भाजपा-रिपब्लिकन पार्टी महायुति की चुनावी सभा को संबोधित करते हुए एकनाथ शिंदे ने उद्योगपतियों, मुंबई की अस्मिता, मराठी मानुष और विकास के मुद्दे पर विपक्ष को कठघरे में खड़ा किया। इस दौरान मंच पर मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, केंद्रीय मंत्री रामदास आठवले और महायुति के वरिष्ठ नेता भी मौजूद थे।
उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने कहा कि जब-जब जरूरत पड़ती है, तब-तब उद्योगपति याद आते हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि धारावी पुनर्विकास परियोजना और नवी मुंबई एयरपोर्ट का काम मुख्यमंत्री रहते हुए किसने उद्योगपति अडानी को दिया। उन्होंने कहा कि आज उद्योगपतियों के नाम पर फेक नैरेटिव फैलाया जा रहा है, लेकिन मुंबई की जमीन, खुले मैदान और भूखंड आखिर किसने दिए, इसका जवाब विपक्ष को देना चाहिए।
एकनाथ शिंदे ने कहा कि सत्ता में रहते हुए एक भूमिका और सत्ता से बाहर आने के बाद दूसरी भूमिका अपनाना यह साफ यू-टर्न की राजनीति है। उन्होंने आरोप लगाया कि जो लोग सार्वजनिक रूप से उद्योगपतियों की आलोचना करते हैं, वही उन्हें घर पर खाने पर बुलाते हैं, उनके बच्चों की शादियों में नाचते हैं। शिंदे ने तंज कसते हुए कहा कि कंटेनर की जरूरत पड़ती है, इसलिए ही उद्योगपतियों पर बयानबाजी की जा रही है।

उपमुख्यमंत्री शिंदे ने उबाठा और मनसे की संभावित एकजुटता पर भी तीखा हमला बोला, उन्होंने कहा कि जो लोग आज कहते हैं कि हमारे झगड़े से बड़ा महाराष्ट्र है, वही लोग 20 साल पहले अलग हुए थे। तब क्या महाराष्ट्र छोटा था? उन्होंने सीधे आरोप लगाया कि बालासाहेब ठाकरे की इच्छा पूरी नहीं की गई, क्योंकि बालासाहेब से बड़ा आपका स्वार्थ और अहंकार था।
शिंदे ने कहा कि मराठी मानुष के प्रति इनका प्रेम पुतना मावशी जैसा है। स्वार्थ के लिए अलग हुए और स्वार्थ के लिए ही फिर एक हो रहे हैं। मुंबईकर जनता यह सब अच्छी तरह जानती है। उन्होंने कहा कि विपक्ष के पास अब कोई मुद्दा नहीं बचा है, केवल आलोचना और तंज ही रह गए हैं, जबकि महायुति विकास के एजेंडे पर आगे बढ़ रही है।

एकनाथ शिंदे ने साफ कहा कि महायुति का एजेंडा “मुंबई फर्स्ट और मुंबईकर फर्स्ट” है। उन्होंने कहा कि मुंबई देश की आर्थिक राजधानी है और उसे उसी तरह विकसित और सुंदर दिखना चाहिए। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विज़न के साथ विकसित भारत, विकसित महाराष्ट्र और विकसित मुंबई का सपना साकार किया जा रहा है।
मराठी मानुष के मुद्दे पर बोलते हुए उपमुख्यमंत्री शिंदे ने कहा कि मुंबई को महाराष्ट्र से कोई अलग नहीं कर सकता। मुंबई कोई रेलवे का डिब्बा नहीं है, जिसे कहीं से हटाकर कहीं जोड़ दिया जाए। मराठी मानुष का अस्तित्व न कभी खतरे में था, न है और न ही भविष्य में रहेगा।

शिंदे ने अपनी सरकार के कामकाज गिनाते हुए कहा कि 20 हजार इमारतों को ओसी देने का फैसला किया गया, पगड़ी मुक्त मुंबई की दिशा में कदम उठाए गए, फनल जोन में अटके पुनर्विकास प्रोजेक्ट्स को गति दी गई। 17 क्लस्टर डेवलपमेंट, स्लम फ्री मुंबई और अगले एक साल में मुंबई को गड्ढा मुक्त करने का लक्ष्य रखा गया है। उन्होंने बताया कि महायुति सरकार ने 10 से 12 हजार मिल मजदूरों को घर दिए हैं और एक लाख मिल मजदूरों को घर देने की योजना पर काम चल रहा है।
महाविकास आघाड़ी पर निशाना साधते हुए एकनाथ शिंदे ने कहा कि उनके कार्यकाल में विकास परियोजनाओं में स्पीड ब्रेकर लगाए गए। मेट्रो-3 का काम रोका गया, जिससे 10 हजार करोड़ रुपये का अतिरिक्त खर्च बढ़ा। उन्होंने कहा कि पुनर्विकास से कुछ लोगों को “खांसी” होती है, लेकिन वर्षों से झोपड़ियों और जर्जर इमारतों में रहने वाले गरीबों की तकलीफ उन्हें नजर नहीं आती।

कोविड काल का जिक्र करते हुए उपमुख्यमंत्री शिंदे ने कहा कि कुछ लोगों ने काम करके नहीं दिखाया, बल्कि खाकर दिखाया। मरीजों की खिचड़ी, बॉडी बैग, कोविड सेंटर और सड़कों के डामर तक में भ्रष्टाचार किया गया। उन्होंने कहा कि “करके दिखाया” नहीं, बल्कि “खाकर दिखाया” के होर्डिंग लगाने चाहिए।
अपने भाषण के अंत में एकनाथ शिंदे ने दोहराया कि महायुति मराठी मानुष, मुंबई और महाराष्ट्र के विकास के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि हम हवा में बातें नहीं करते, हमारा काम बोलता है और आगे भी विकास ही हमारा एकमात्र एजेंडा रहेगा।