नई दिल्ली: भारतीय रेल में परोसे जाने वाले नॉन-वेज भोजन को लेकर उठे विवाद पर राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग यानी एनएचआरसी ने सख्त रुख अपनाया है। आयोग ने रेलवे बोर्ड, खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) और पर्यटन मंत्रालय से दोबारा विस्तृत एक्शन टेकन रिपोर्ट (ATR) तलब की है। यह मामला 21 नवंबर 2025 को दर्ज कराई गई एक शिकायत से जुड़ा है, जिस पर 5 जनवरी 2026 को आयोग में सुनवाई हुई थी।
शिकायत में आरोप लगाया गया है कि भारतीय रेल और आईआरसीटीसी के माध्यम से यात्रियों को केवल हलाल तरीके से तैयार किया गया मांस परोसा जा रहा है। शिकायतकर्ता का कहना है कि इससे यात्रियों की भोजन संबंधी पसंद और धार्मिक स्वतंत्रता प्रभावित होती है। साथ ही यह हिंदू अनुसूचित जाति समुदायों के उन लोगों की आजीविका पर भी असर डालता है, जो परंपरागत रूप से मांस व्यापार से जुड़े रहे हैं।

एनएचआरसी ने इस मामले में संविधान के अनुच्छेद 14, 15, 19(1)(जी), 21 और 25 के उल्लंघन की आशंका जताई है। आयोग ने कहा है कि हिंदू और सिख यात्रियों को उनकी धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भोजन का विकल्प मिलना चाहिए। आयोग ने सिख रहत मर्यादा का हवाला देते हुए यह भी स्पष्ट किया कि अमृतधारी सिखों के लिए मुस्लिम तरीके से काटे गए जानवर का मांस खाना वर्जित है, ऐसे में भोजन की जानकारी सार्वजनिक करना बेहद जरूरी है।
इससे पहले आयोग के निर्देश पर आईआरसीटीसी ने 10 दिसंबर 2025 को एक रिपोर्ट सौंपी थी, जिसमें कहा गया था कि हलाल प्रमाणन को लेकर उसकी कोई अनिवार्य नीति नहीं है और वह केवल एफएसएसएआई के मानकों का पालन करता है। हालांकि, एनएचआरसी ने इस रिपोर्ट को अधूरी और पारदर्शिता से रहित बताते हुए खारिज कर दिया।

अब आयोग ने रेलवे बोर्ड को निर्देश दिया है कि वह चार सप्ताह के भीतर नई और विस्तृत एटीआर दाखिल करे। इस रिपोर्ट में सभी रेलवे स्टेशनों, ट्रेनों, होटलों और रेस्टोरेंट्स में भोजन सप्लाई करने वाले ठेकेदारों की सूची, और यह स्पष्ट जानकारी शामिल होनी चाहिए कि वे हलाल, झटका या दोनों प्रकार का मांस परोसते हैं।
इसके साथ ही एनएचआरसी ने एफएसएसएआई को अपने गुणवत्ता मानकों में मांस काटने की विधि से जुड़ी जानकारी को शामिल करने पर रिपोर्ट देने के निर्देश दिए हैं। वहीं पर्यटन मंत्रालय से होटल की स्टार रेटिंग और वर्गीकरण प्रणाली में इस तरह के खुलासे से जुड़े प्रावधान जोड़ने पर जवाब मांगा गया है।
एनएचआरसी ने साफ शब्दों में कहा है कि इस पूरे मामले में पारदर्शिता, समानता और यात्रियों की स्वतंत्रता को सर्वोपरि रखा जाना चाहिए।