सोमनाथ सूर्यवंशी कस्टडी डेथ मामले में आज मुंबई उच्च न्यायालय की औरंगाबाद खंडपीठ में अहम सुनवाई हुई। सुनवाई के दौरान पुलिस विभाग और गृह विभाग की ओर से अपने-अपने प्रतिज्ञापत्र अदालत में दाखिल किए गए। गृह विभाग की ओर से मुख्य सचिव का प्रतिज्ञापत्र भी पेश किया गया।
इस मामले में अदालत के सामने भारतीय न्याय संहिता की धारा 196 के तहत एक गंभीर कानूनी खामी को उजागर किया गया। दलीलों में कहा गया कि पुलिस हिरासत में किसी व्यक्ति की मौत होने के बाद मजिस्ट्रेट द्वारा जांच किए जाने के बाद आगे की कानूनी प्रक्रिया क्या होगी, इस संबंध में कानून में स्पष्ट प्रावधान मौजूद नहीं है। केंद्र सरकार और महाराष्ट्र सरकार ने अब तक इस अधूरे कानून में कोई संशोधन नहीं किया है।

याचिकाकर्ता की ओर से अदालत को बताया गया कि जिन अधिकारियों को न्यायालय ने जवाब देने के लिए तलब किया है, उनके पास नीतिगत निर्णय लेने का अधिकार नहीं है। वे केवल सरकार द्वारा लिए गए नीतिगत फैसलों को लागू करने के लिए अधिकृत हैं। ऐसे में यह मामला केवल प्रशासनिक नहीं, बल्कि सीधे तौर पर कानून और नीति से जुड़ा हुआ है।
अदालत से यह भी आग्रह किया गया कि शहीद सोमनाथ सूर्यवंशी को न्याय दिलाने के लिए या तो न्यायालय स्वयं कानून की इस खामी को भरने के लिए दिशा-निर्देश जारी करे, या फिर गृह विभाग के मंत्री को तलब कर उनसे यह स्पष्ट पूछा जाए कि क्या सरकार इस अधूरे कानून को पूरा करने का इरादा रखती है या नहीं।

सुनवाई के अंत में हाईकोर्ट ने इस मामले की गंभीरता को देखते हुए प्रकरण को कल सुबह दोबारा सुनवाई के लिए सूचीबद्ध कर दिया है। अब सबकी नजरें कल होने वाली सुनवाई पर टिकी हैं, जहां इस संवेदनशील मामले में न्यायालय कोई अहम दिशा तय कर सकता है।