नई दिल्ली:पूर्व सेना प्रमुख जनरल एम. एम. नरवणे की किताब को लेकर संसद के भीतर और बाहर सियासी घमासान तेज हो गया है। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने मोदी सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि 2020 के भारत-चीन सीमा तनाव के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने तत्कालीन सेना प्रमुख को स्पष्ट निर्देश देने के बजाय संदेश दिया था “जो उचित समझो, वो करो।” राहुल गांधी के इस दावे के बाद राजनीतिक हलकों में हलचल मच गई है।
राहुल गांधी ने संसद परिसर में मीडिया से बातचीत करते हुए कहा कि सरकार और स्पीकर यह कह रहे हैं कि ऐसी कोई किताब है ही नहीं, जबकि यह पूर्व सेना प्रमुख नरवणे की लिखी हुई किताब है, जिसमें उस दौर की पूरी स्थिति दर्ज है। राहुल ने कहा कि प्रधानमंत्री यदि लोकसभा में आए, तो वे स्वयं जाकर उन्हें यह किताब भेंट करेंगे, ताकि वे इसे पढ़ सकें और देश को सच्चाई का पता चल सके।

राहुल गांधी ने दावा किया कि किताब में लिखा है कि जब चीनी टैंक कैलाश रिज तक पहुंच गए थे, तब तत्कालीन आर्मी चीफ जनरल नरवणे ने रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह से संपर्क किया और पूछा कि आगे क्या कार्रवाई की जाए। राहुल के मुताबिक, पहले उन्हें कोई स्पष्ट जवाब नहीं मिला। इसके बाद विदेश मंत्री एस. जयशंकर, एनएसए और रक्षा मंत्री से भी संपर्क की कोशिश की गई, लेकिन निर्णय नहीं आया..
बाद में रक्षा मंत्री ने कहा कि वे ‘टॉप’ से पूछेंगे…
राहुल गांधी का आरोप है कि उस समय ‘टॉप’ का स्टैंडिंग ऑर्डर था कि चीनी सेना के आने पर बिना अनुमति गोली नहीं चलाई जाएगी। राहुल के अनुसार, जनरल नरवणे और भारतीय सेना चीनी टैंकों पर कार्रवाई करना चाहती थी क्योंकि वे भारतीय इलाके में घुस आए थे, लेकिन इसी दौरान प्रधानमंत्री मोदी की ओर से संदेश आया “जो उचित समझो, वो करो।”

राहुल गांधी ने इसे प्रधानमंत्री की जिम्मेदारी से बचने वाला रवैया करार देते हुए कहा कि इसका मतलब यह है कि उस वक्त सिस्टम ने सेना प्रमुख को अकेला छोड़ दिया। राहुल ने दावा किया कि नरवणे जी ने अपनी किताब में लिखा है कि उस स्थिति में उन्हें बेहद अकेला महसूस हुआ और पूरा सिस्टम उनसे कट गया था।
मीडिया के सवाल पर कि यह किताब कहां से मिली और क्या आम लोगों को भी यह किताब मिल सकती है, राहुल गांधी ने कहा “You can imagine where the book came from” यानी “आप अंदाजा लगा सकते हैं कि यह किताब कहां से आई होगी।” राहुल गांधी ने दोहराया कि देश के हर युवा को यह किताब पढ़नी चाहिए, ताकि उन्हें पता चले कि सीमा पर उस समय क्या हालात थे और फैसले कैसे लिए गए।
इस पूरे बयान के बाद कांग्रेस और बीजेपी के बीच टकराव और तेज हो गया है, वहीं सरकार की ओर से इन आरोपों पर जवाब का इंतजार किया जा रहा है।