दावोस दौरे को लेकर महाराष्ट्र की राजनीति एक बार फिर गरमा गई है। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के दावोस दौरे की आलोचना करने वाले शिवसेना (उबाठा) सांसद संजय राउत पर भारतीय जनता पार्टी ने तीखा हमला बोला है। भाजपा प्रदेश मीडिया विभाग प्रमुख नवनाथ बन ने सवाल उठाया है कि संजय राउत ने आज तक कम से कम 13 लोगों को भी रोजगार दिया है या नहीं।
मुंबई स्थित भाजपा प्रदेश कार्यालय में आयोजित पत्रकार परिषद को संबोधित करते हुए नवनाथ बन ने कहा कि दावोस में महाराष्ट्र के लिए करीब 15 लाख करोड़ रुपये के निवेश समझौते हुए हैं, जिनसे लगभग 13 लाख लोगों को रोजगार मिलने की संभावना है। ऐसे में इस दौरे की आलोचना करने के बजाय संजय राउत को राज्य में बनने वाले रोजगार पर खुशी जतानी चाहिए थी, लेकिन उन्होंने इसके उलट जलन दिखाई है।

नवनाथ बन ने उद्धव ठाकरे के मुख्यमंत्री कार्यकाल पर भी सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि ढाई साल तक मुख्यमंत्री रहने के बावजूद उद्धव ठाकरे ने क्या कम से कम 1300 लोगों को भी रोजगार दिया था, इसका जवाब संजय राउत को देना चाहिए। बन ने आरोप लगाया कि विदेशी निवेश लाने के लिए कौशल और नेतृत्व क्षमता की जरूरत होती है, जो मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने दावोस में साबित की है।
भाजपा नेता ने आदित्य ठाकरे पर भी निशाना साधते हुए कहा कि अगर संजय राउत को दावोस दौरे से इतना ही विरोध है, तो उन्हें आदित्य ठाकरे से यह पूछने का साहस दिखाना चाहिए कि वे दावोस जाकर महाराष्ट्र के लिए कितना निवेश लेकर आए। दावोस में हुए निवेश समझौतों से राज्य में बड़े पैमाने पर रोजगार सृजन होगा, जो हर महाराष्ट्रवासी के लिए गर्व की बात है।
नवनाथ बन ने कहा कि देवेंद्र फडणवीस और एकनाथ शिंदे के नेतृत्व में महाराष्ट्र को सुशासन मिला है, इसी वजह से विदेशी निवेशकों की पहली पसंद महाराष्ट्र बना है। उन्होंने यह भी कहा कि देवेंद्र फडणवीस की कार्यशैली और कर्तृत्व से ‘देवाभाऊ’ सिर्फ देश में ही नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी एक भरोसेमंद ब्रांड बन चुके हैं, और यही बात संजय राउत को परेशान कर रही है।

इसके साथ ही नवनाथ बन ने शिवसेना (उबाठा) की आंतरिक राजनीति पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि भाजपा कार्यकर्ताओं की पार्टी है, जहां एक सामान्य कार्यकर्ता भी राष्ट्रीय अध्यक्ष पद तक पहुंच सकता है, जबकि उबाठा गुट में केवल ठाकरे परिवार के सदस्यों को ही अवसर मिलते हैं। राज्यसभा चुनाव का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि संजय राउत ने किसी सामान्य कार्यकर्ता को मौका देने के बजाय खुद का नाम आगे बढ़ाया।
पत्रकार परिषद में नवनाथ बन ने वरिष्ठ नेता और पूर्व सांसद राहुल शेवाळे को भी नसीहत दी। उन्होंने कहा कि सार्वजनिक मंचों से आरोप-प्रत्यारोप करने से बचना चाहिए, क्योंकि महायुति में सभी दलों के कार्यकर्ताओं ने मिलकर चुनाव लड़ा है। ऐसे बयान, जिनसे गठबंधन में मतभेद पैदा हों, उनसे सभी को बचना चाहिए।
दावोस निवेश को लेकर शुरू हुआ यह सियासी घमासान आने वाले दिनों में और तेज होने के संकेत दे रहा है।