मुंबई से बड़ी राजनीतिक खबर सामने आई है। भारतीय जनता पार्टी के मीडिया विभाग प्रमुख नवनाथ बन ने शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे गुट) के नेता संजय राऊत और इंडी गठबंधन पर तीखा हमला बोला है। भाजपा प्रदेश कार्यालय में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में नवनाथ बन ने कहा कि संजय राऊत ने खुद ही पत्रकार परिषद के जरिए इंडी गठबंधन के अंदरूनी मतभेदों को उजागर कर दिया है।
उन्होंने आरोप लगाया कि इंडी गठबंधन विचारधारा पर नहीं बल्कि सिर्फ सत्ता हासिल करने के उद्देश्य से बना है, इसलिए यह गठबंधन टिकाऊ नहीं हो सकता। बन ने कहा कि इस गठबंधन के पास कोई ठोस एजेंडा नहीं है और भाजपा विरोध ही इसका एकमात्र एजेंडा है, जिसे देश की जनता पहले ही नकार चुकी है।

नवनाथ बन ने कहा कि इंडी गठबंधन में नेतृत्व को लेकर ही एकमत नहीं है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि अगर उद्धव ठाकरे का नाम राष्ट्रीय स्तर पर नेतृत्व के लिए आगे किया जाता है, तो जिस तरह महाराष्ट्र में परिणाम आए, वैसा ही हाल देशभर में होगा।
विधानसभा चुनाव का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि महाविकास आघाड़ी ने बड़े दावे किए थे, लेकिन जनता ने भाजपा महायुति को सत्ता में बैठाया। उन्होंने दावा किया कि भाजपा ने अकेले 137 सीटें जीतकर खुद को नंबर एक पार्टी साबित किया, जबकि उद्धव ठाकरे गुट को 90 सीटों पर चुनाव लड़ने के बावजूद केवल 20 सीटें ही मिलीं।
राहुल गांधी के नेतृत्व पर भी भाजपा नेता ने सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी के नेतृत्व से भाजपा नहीं, बल्कि खुद कांग्रेस चिंतित है। उन्होंने आरोप लगाया कि 2009 से अब तक राहुल गांधी के नेतृत्व को कई बार “रिलॉन्च” करने की कोशिश की गई, लेकिन हर बार कांग्रेस को निराशा ही हाथ लगी।

नवनाथ बन ने यह भी कहा कि राज्यसभा सदस्यता को लेकर संजय राऊत कांग्रेस के करीब जाने की कोशिश कर रहे हैं। उनका दावा है कि कांग्रेस अकेले रहे या किसी गठबंधन में, उसके राजनीतिक हालात में कोई बड़ा बदलाव नहीं होगा।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व की सराहना करते हुए बन ने कहा कि मोदी सरकार के रहते भारत किसी के सामने झुकने वाला नहीं है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय मुद्दों और देश की सुरक्षा के मामले में एनडीए सरकार दृढ़ता से काम कर रही है।
महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के नेतृत्व को भी उन्होंने मजबूत और दूरदर्शी बताया। बन ने दावा किया कि राज्य और केंद्र में भाजपा के नेतृत्व में विकास की गति तेज हुई है और विपक्ष के पास ठोस मुद्दों का अभाव है।
कुल मिलाकर, भाजपा की इस प्रेस कॉन्फ्रेंस ने महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर सियासी गर्मी बढ़ा दी है। आने वाले दिनों में इंडी गठबंधन के भीतर नेतृत्व और रणनीति को लेकर बहस और तेज होने की संभावना है।