Home दुनियामोदी सरकार पर ट्रम्प का दबाव? राफेल खरीद पर प्रकाश आंबेडकर ने उठाए 5 बड़े सवाल

मोदी सरकार पर ट्रम्प का दबाव? राफेल खरीद पर प्रकाश आंबेडकर ने उठाए 5 बड़े सवाल

by ashishppandya90@gmail.com
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मुंबई: MRFA यानी मल्टी-रोल फाइटर एयरक्राफ्ट कार्यक्रम के तहत भारत सरकार फ्रांस से 114 राफेल लड़ाकू विमान खरीदने की तैयारी में है। इसी बीच वंचित बहुजन आघाड़ी के राष्ट्रीय अध्यक्ष प्रकाश आंबेडकर ने इस संभावित सौदे की पारदर्शिता और शर्तों को लेकर केंद्र सरकार से कई गंभीर सवाल पूछे हैं।
आंबेडकर ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह से स्पष्टीकरण मांगते हुए कहा कि रक्षा खरीद में की गई एक गलती देश की सुरक्षा पर दशकों तक असर डाल सकती है।
उन्होंने सबसे पहले यह सवाल उठाया कि राफेल बनाने वाली कंपनी Dassault Aviation क्या विमान का सोर्स कोड भारत के साथ साझा करेगी? आंबेडकर का कहना है कि यदि सोर्स कोड भारत को नहीं मिलता है तो भारतीय वायुसेना भविष्य में बदलते सुरक्षा खतरों के अनुसार विमान की ‘थ्रेट लाइब्रेरी’ को स्वतंत्र रूप से अपडेट नहीं कर पाएगी।

दूसरा बड़ा सवाल उन्होंने तकनीक हस्तांतरण यानी ट्रांसफर ऑफ टेक्नोलॉजी (ToT) को लेकर उठाया। उन्होंने पूछा कि क्या इस सौदे में 100 प्रतिशत तकनीकी हस्तांतरण शामिल है या फिर यह केवल पुर्जे जोड़कर विमान तैयार करने तक सीमित रहेगा। उनका कहना है कि आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए पूर्ण तकनीक हस्तांतरण जरूरी है।
तीसरे बिंदु पर आंबेडकर ने रूस के पांचवीं पीढ़ी के Su-57E विमान के कथित प्रस्ताव का जिक्र करते हुए पूछा कि यदि रूस सस्ता और पूर्ण तकनीक हस्तांतरण देने को तैयार है तो भारत 4.5 पीढ़ी के राफेल पर अधिक खर्च क्यों कर रहा है।
चौथे सवाल में उन्होंने यह भी पूछा कि क्या अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की ओर से रूस से रक्षा खरीद न करने को लेकर कोई दबाव है।

इसके अलावा उन्होंने यह भी स्पष्ट करने को कहा कि 18 विमान सीधे फ्रांस से आने के बाद शेष 96 विमानों का निर्माण भारत में कौन करेगा—क्या यह जिम्मेदारी हिंदुस्तान एरोनॉटिक्स लिमिटेड को दी जाएगी या किसी निजी कंपनी को।
आंबेडकर ने कहा कि रक्षा सौदों में पारदर्शिता और दीर्घकालिक रणनीतिक सोच बेहद आवश्यक है, क्योंकि राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े निर्णयों में किसी भी प्रकार की चूक देश के लिए महंगी साबित हो सकती है। फिलहाल राफेल संभावित सौदे को लेकर राजनीतिक बहस तेज होती नजर आ रही है।

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