मुंबई: महाराष्ट्र में मुस्लिम समाज से जुड़े आरक्षण को लेकर सियासत तेज हो गई है। राज्य सरकार के सामाजिक न्याय एवं विशेष सहायता विभाग द्वारा 17 फरवरी 2026 को जारी एक शासन निर्णय के तहत मुस्लिम समाज के विशेष पिछड़ा वर्ग–‘अ’ श्रेणी के अंतर्गत जाति प्रमाणपत्र और जाति वैधता प्रमाणपत्र जारी करने संबंधी पुराने सभी शासन निर्णय और परिपत्र रद्द कर दिए गए हैं। इस फैसले को लेकर कांग्रेस ने भाजपा नीत महायुति सरकार पर तीखा हमला बोला है।
मुंबई कांग्रेस अध्यक्ष और लोकसभा सांसद वर्षा गायकवाड ने इसे लोकतंत्र और सामाजिक न्याय की भावना के खिलाफ बताया है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी की गठबंधन सरकार ने वर्ष 2014 में मुस्लिम समाज को शिक्षा और नौकरियों में 5 प्रतिशत आरक्षण देने की घोषणा की थी। लेकिन वर्तमान सरकार ने इस दिशा में सकारात्मक पहल करने के बजाय पुरानी प्रक्रियाओं को ही रद्द कर दिया है।

उन्होंने आरोप लगाया कि उच्च न्यायालय की अंतरिम स्थगन और अध्यादेश की अवधि समाप्त होने का हवाला देकर सरकार ने मुस्लिम समाज के अधिकारों पर प्रहार किया है। गायकवाड ने कहा कि एक ओर “सबका साथ, सबका विकास” का नारा दिया जाता है, वहीं दूसरी ओर आरक्षण से संबंधित आवश्यक दस्तावेज प्राप्त करने की प्रक्रिया ही बंद कर दी जाती है। यह सरकार का दोहरा रवैया दर्शाता है।
गायकवाड ने यह भी कहा कि मुस्लिम समाज को दिया गया आरक्षण धर्म के आधार पर नहीं था, बल्कि सामाजिक और शैक्षणिक पिछड़ेपन के आधार पर था। उनके अनुसार, इस फैसले से भाजपा की आरक्षण विरोधी मानसिकता एक बार फिर उजागर हुई है।
उन्होंने सत्तारूढ़ दलों शिवसेना और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी से इस मुद्दे पर अपनी स्पष्ट भूमिका सामने रखने की मांग की। साथ ही, कांग्रेस नेता और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी द्वारा की जा रही जाति आधारित जनगणना की मांग का समर्थन करते हुए कहा कि सामाजिक न्याय सुनिश्चित करने के लिए जातिवार जनगणना एक प्रभावी उपाय हो सकता है।

महाराष्ट्र की राजनीति में इस फैसले को लेकर अब आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज हो गया है। आने वाले दिनों में यह मुद्दा और अधिक तूल पकड़ सकता है।