पार्ले-जी फैक्ट्री का इतिहास और महत्व
पार्ले-जी बिस्कुट ब्रांड, भारत में सबसे लोकप्रिय और पहचानने योग्य खाद्य ब्रांडों में से एक है। यह ब्रांड 1929 में मुंबई के विले पार्ले में स्थापित पार्ले प्रोडक्ट्स के औद्योगिक परिसर से शुरू हुआ था। शुरू में यहाँ कैंडी और टोफी का निर्माण होता था, लेकिन 1939 के आसपास बिस्कुट उत्पादन शुरू हुआ और पार्ले-जी ने भारतीय उपभोक्ता संस्कृति में अपनी जगह पक्की की।
मुंबई के लिए यह फैक्ट्री सिर्फ एक औद्योगिक इकाई नहीं थी बल्कि कई पीढ़ियों के लिए एक भावनात्मक प्रतीक भी थी — स्थानीय लोगों को ट्रेन से गुजरते हुए बिस्कुट की महक महसूस होती थी, जो एक खास याद बन चुकी थी।
हालाँकि यह खाना बनाना और उत्पादन स्थान पिछले कई वर्षों में कम हो गया था, और 2016 में उत्पादन पूरी तरह से बंद हो गया था, तब से यह फैक्ट्री एक ऐतिहासिक स्थल के रूप में ही मौजूद थी।

पुनर्विकास को मंजूरी — क्या होने वाला है?
अब 97 साल पुरानी इस फैक्ट्री की मुख्य भवन और परिसर के ढांचे को भविष्य के व्यावसायिक उपयोग के लिए पुनर्विकसित करने का प्रस्ताव मंजूर हो गया है। यह मंजूरी राज्य पर्यावरण परिणाम मूल्यांकन प्राधिकरण (SEIAA) ने दी है, जो भारत सरकार के पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के अधीन आता है। इससे फैक्ट्री के परिसरों में मौजूद 21 पुरानी और जीर्ण इमारतों को गिराने की अनुमति मिल गई है।
अब इस जगह एक बड़ा व्यावसायिक परिसर विकसित किया जाना है। इसमें शामिल होंगे:
- कुल 1,90,360.52 वर्ग मीटर का निर्मित क्षेत्र।
- चार मुख्य ऑफ़िस/कमर्शियल बिल्डिंग्स, प्रत्येक के दो बेसमेंट स्तर होंगे।
- पहली तीन इमारतों में छह-छह फ्लोर होंगे, जिनमें से कुछ हिस्से को रिटेल, रेस्टोरेंट और ऑफिस स्पेस के लिए आरक्षित किया गया है।
- अलग से दो पार्किंग टावर्स (तीन और छह मंज़िल) भी बनेंगे।
पूरी परियोजना की अनुमानित लागत करीब ₹3,961 करोड़ बताई जा रही है, जो इसे मुंबई के प्रमुख रियल एस्टेट प्रोजेक्टों में से एक बनाती है।
उच्च निवेश के कारण इस परियोजना से प्रभावित होने वाले नेटवर्क में office space, retail spaces, recreation zones, food courts और शहरी आकर्षण केंद्र शामिल हो सकते हैं।

ऐतिहासिक और भावनात्मक पहलू
बहुत से मुंबईकरों के लिए पार्ले-जी फैक्ट्री सिर्फ एक औद्योगिक इकाई नहीं थी — यह एक स्मृति-स्थान थी। स्टेशन से गुजरते समय बिस्कुट की महक, स्थानीय दुकानों में इसके पैकेटों की मौजूदगी, और बच्चों की यादें इससे जुड़ी हुईं थीं। फैक्ट्री ने एक दशक-पुरानी पहचान दी थी, खासकर विले पार्ले नामकरण में भी इसका योगदान माना जाता है।
पर्यावरण मंजूरी के बाद इसका ढांचा हटाया जाना कुछ लोगों के लिए “युग का अंत” जैसा अनुभव होगा। इतिहासकारों और स्थानीयों के मन में यह सवाल जरूर आएगा कि आधुनिक विकास के साथ क्या हम अपनी संस्कृति-विरासत को खो देंगे?

97 साल पुरानी पार्ले-जी फैक्ट्री का विले पार्ले में व्यावसायिक पुनर्विकास के लिए मंजूर होना सिर्फ एक रियल एस्टेट खबर नहीं है — यह मुंबई की सामाजिक-आर्थिक, सांस्कृतिक और शहरी परंपरा के बदलते स्वरूप का संकेत है।
यह परियोजना पार्ले-जी के ऐतिहासिक औद्योगिक स्थल को आधुनिक व्यावसायिक परिसरों में बदल देगी, जो महंगी भूमि उपयोग रणनीतियों, निवेश और शहर की बदलती पहचान को रेखांकित करती है।
अगर आपको इस परियोजना के लाभ-हानि, स्थानीय जनता की प्रतिक्रिया, या निर्माण प्रक्रिया आने वाले चरणों के बारे में भी विस्तार चाहिए तो मैं वह जानकारी भी दे सकता हूँ।