महाराष्ट्र में बीते 15 वर्षों से लगातार समाजसेवा में सक्रिय राजे फाउंडेशन ने एक बार फिर मानवता की मिसाल पेश की है। कला, क्रीड़ा, शैक्षणिक, सामाजिक और सांस्कृतिक क्षेत्र में कार्यरत यह संस्था छत्रपति शिवाजी महाराजों के शिव विचारों को समाज के हर वर्ग तक पहुंचाने के उद्देश्य से काम कर रही है।
राजे फाउंडेशन इससे पहले मराठवाड़ा में अतिवृष्टि और बाढ़ की भयावह स्थिति के दौरान पीड़ितों के लिए मदद का बड़ा हाथ बढ़ा चुका है। उस समय संस्था के कार्यकर्ता स्वयं आपदा प्रभावित इलाकों में पहुंचे थे और 20 गांवों में करीब 2000 किराना किट का वितरण किया था। नमक से लेकर थाली तक, जरूरत की हर सामग्री पीड़ितों तक पहुंचाकर फाउंडेशन ने राहत कार्य में अहम भूमिका निभाई थी।

अब कड़ाके की ठंड को देखते हुए राजे फाउंडेशन ने मुंबई के कस्तूरबा अस्पताल में भर्ती मरीजों के लिए “माये की ऊष्मा” नामक सेवा अभियान का आयोजन किया। इस कार्यक्रम के तहत अस्पताल में इलाजरत लगभग 300 मरीजों को कंबल वितरित किए गए। इसके साथ ही मरीजों को बिस्किट के पैकेट, विभिन्न प्रकार के फल और जूस भी दिए गए, ताकि उन्हें ठंड के मौसम में राहत मिल सके और मानसिक संबल भी प्राप्त हो।
इस सेवा कार्य को सफल बनाने में राजे फाउंडेशन के अध्यक्ष श्री सिद्धांत पिसाळ, सचिव श्री रोहित पिसाळ, उप-कोषाध्यक्ष ऋषिकेश आचारी, सोशल मीडिया प्रमुख प्रदीप कस्तुरे और मयुरेश पाटील के साथ-साथ प्रशांत गुप्ता, सूर्यकांत रेडेकर, योगेश कांबळे, राहुल माने सहित कई पदाधिकारी और सदस्य उपस्थित रहे। कस्तूरबा अस्पताल का प्रशासन, डीन और वहां की नर्सिंग स्टाफ ने भी इस मानवीय पहल में सक्रिय सहभाग किया।

राजे फाउंडेशन का यह प्रयास न केवल जरूरतमंद मरीजों के लिए राहत का माध्यम बना, बल्कि समाज को यह संदेश भी दिया कि शिव विचारों से प्रेरित सेवा और संवेदना आज भी जीवित है। संस्था ने एक बार फिर साबित किया कि सच्ची समाजसेवा वही है, जो जरूरत के समय सीधे इंसान तक पहुंचे।