महाराष्ट्र सरकार की महत्वाकांक्षी मुख्यमंत्री माझी लाडकी बहिण योजना को लेकर एक बड़ा और अहम फैसला सामने आया है। योजना के तहत लाभार्थी महिलाओं के e-KYC में सामने आई गड़बड़ियों के बाद अब सरकार ने फिजिकल KYC वेरिफिकेशन कराने का निर्णय लिया है। इस प्रक्रिया के तहत आंगनवाड़ी सेविकाएं घर-घर जाकर लाभार्थी महिलाओं की जानकारी और दस्तावेजों का सत्यापन करेंगी।
सरकारी स्तर पर की गई समीक्षा में यह बात सामने आई कि e-KYC प्रक्रिया के दौरान कई महिलाओं ने अनजाने में गलत विकल्प चुन लिया था। इसके चलते पात्र और अपात्र लाभार्थियों की पहचान में भ्रम की स्थिति पैदा हो गई। इसी समस्या को दूर करने और योजना में पारदर्शिता बनाए रखने के लिए सरकार ने फील्ड लेवल पर फिजिकल वेरिफिकेशन का रास्ता अपनाया है।

राज्य सरकार ने इस संबंध में सभी जिलाधिकारियों को स्पष्ट निर्देश जारी कर दिए हैं। निर्देशों के अनुसार आंगनवाड़ी सेविकाएं सीधे लाभार्थी महिलाओं के घर जाकर उनकी पात्रता, दस्तावेज और योजना से जुड़ी जानकारी की जांच करेंगी। सत्यापन के बाद ही यह तय किया जाएगा कि संबंधित महिला योजना के तहत मिलने वाली आर्थिक सहायता की वास्तविक हकदार है या नहीं।
सरकार का कहना है कि इस कदम का उद्देश्य किसी भी महिला को परेशान करना नहीं है, बल्कि यह सुनिश्चित करना है कि सरकारी योजना का लाभ सही और जरूरतमंद महिलाओं तक ही पहुंचे। मुख्यमंत्री माझी लाडकी बहिण योजना के तहत दी जा रही आर्थिक सहायता, महिलाओं के स्वास्थ्य, पोषण और सशक्तिकरण से जुड़ी हुई है, ऐसे में लाभार्थियों की सही पहचान बेहद जरूरी है।

प्रशासन ने लाभार्थी महिलाओं से अपील की है कि जब आंगनवाड़ी सेविका सत्यापन के लिए पहुंचे, तो वे आधार कार्ड, राशन कार्ड और अन्य जरूरी दस्तावेज उपलब्ध कराएं और पूरा सहयोग करें। इससे सत्यापन प्रक्रिया समय पर और पारदर्शी तरीके से पूरी हो सकेगी।
जानकारों का मानना है कि यह फैसला सरकारी योजनाओं में पारदर्शिता और जवाबदेही की दिशा में एक अहम कदम है। साफ है कि सरकार मुख्यमंत्री माझी लाडकी बहिण योजना में किसी भी तरह की गड़बड़ी या फर्जीवाड़े की गुंजाइश नहीं छोड़ना चाहती और वास्तविक जरूरतमंद महिलाओं तक योजना का पूरा लाभ पहुंचाने के लिए सख्त कदम उठा रही है।