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महालक्ष्मी केबल-स्टेड फ्लाईओवर का काम तेज़, 78.5 मीटर ऊंचे पायलॉन का 55% निर्माण पूरा

by ashishppandya90@gmail.com
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मुंबई के महालक्ष्मी इलाके में यातायात जाम से राहत दिलाने के लिए बन रहा केबल-स्टेड फ्लाईओवर तेज़ी से आकार ले रहा है। महालक्ष्मी रेलवे स्टेशन के पास केशवराव खाड्ये मार्ग पर बन रहे इस अत्याधुनिक उड्डाणपुल के सबसे अहम हिस्से 78.5 मीटर ऊंचे पायलॉन का निर्माण 55 प्रतिशत तक पूरा हो चुका है। इस प्रोजेक्ट की प्रगति का जायजा लेने के लिए अतिरिक्त महानगरपालिका आयुक्त (प्रकल्प) अभिजीत बांगर ने गुरुवार, 22 जनवरी 2026 को स्थल निरीक्षण किया।

यह फ्लाईओवर पश्चिम रेलवे की पटरियों के ऊपर बनने वाला बृहन्मुंबई महानगरपालिका का पहला केबल-आधारित पुल है। यह पुल सात रस्ता से महालक्ष्मी मैदान को जोड़ेगा, जिससे महालक्ष्मी क्षेत्र में लंबे समय से चली आ रही ट्रैफिक समस्या को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है। फ्लाईओवर की कुल लंबाई 803 मीटर और चौड़ाई 17.2 मीटर है, जबकि रेलवे सीमा के भीतर इसकी चौड़ाई 23.01 मीटर रखी गई है।

निरीक्षण के दौरान अभिजीत बांगर ने परियोजना की समय-सीमा को लेकर स्पष्ट निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि पायलॉन, पहुंच मार्ग और सभी संबंधित कार्य तय समय में पूरे होने चाहिए, ताकि 31 अक्टूबर 2026 तक फ्लाईओवर को पूरी तरह यातायात के लिए खोल दिया जाए। साथ ही उन्होंने सुरक्षा मानकों, गुणवत्ता नियंत्रण प्रक्रियाओं और तकनीकी जांच का सख्ती से पालन करने के निर्देश भी दिए।

अभिजीत बांगर ने बताया कि केबल-स्टेड पुल में पायलॉन सबसे महत्वपूर्ण और भार वहन करने वाला हिस्सा होता है। इसी पायलॉन से पुल के डेक को सहारा देने वाली केबल्स जुड़ी होती हैं। प्रस्तावित 78.5 मीटर ऊंचा पायलॉन इंजीनियरिंग की दृष्टि से बेहद चुनौतीपूर्ण है। इसकी डिजाइन आधुनिक तकनीक से की गई है, जिसमें उच्च गुणवत्ता वाले कंक्रीट और मजबूत स्टील का उपयोग किया गया है। हवा, भूकंप, भारी यातायात और लंबे समय तक उपयोग को ध्यान में रखते हुए पायलॉन की मजबूती और स्थायित्व सुनिश्चित किया गया है।

पायलॉन निर्माण के लिए अत्याधुनिक और पायलॉन से भी अधिक ऊंची क्रेन को साइट पर लगाया गया है, जिसकी मदद से चरणबद्ध तरीके से निर्माण कार्य किया जा रहा है। फिलहाल पायलॉन का 55 प्रतिशत काम पूरा हो चुका है और शेष निर्माण कार्य तय कार्यक्रम के अनुसार जारी है। निर्देश दिए गए हैं कि पायलॉन और उससे जुड़े सभी कार्य 31 मार्च 2026 तक पूरे कर लिए जाएं।

परियोजना के तहत पायलॉन के पश्चिम दिशा में 95 मीटर और पूर्व दिशा में 165 मीटर के दो अलग-अलग स्पैन बनाए जा रहे हैं। पश्चिम दिशा के 95 मीटर स्पैन को फरवरी 2026 के अंत तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। वहीं पूर्व दिशा का 165 मीटर लंबा स्पैन रेलवे सीमा में आता है, जिसके लिए रेलवे से आवश्यक ब्लॉक मिलने के बाद काम शुरू किया जाएगा। यह काम 15 मार्च 2026 से 15 अक्टूबर 2026 के बीच पूरा करने की योजना है।

पायलॉन के दोनों ओर अधिकांश खंभों का निर्माण पूरा हो चुका है, लेकिन ट्रैफिक डायवर्जन के चलते पांच खंभों का काम अभी बाकी है। इसके अलावा पूर्व और पश्चिम दिशा के पहुंच मार्गों का काम भी अभी शुरू नहीं हुआ है। इन सभी शेष कार्यों को 30 जून 2026 तक पूरा करने का प्रस्ताव है।

अतिरिक्त महानगरपालिका आयुक्त ने यह भी निर्देश दिए कि पायलॉन, पुल सेगमेंट और अन्य स्टील सामग्री समय पर उपलब्ध हो, इसके लिए फैब्रिकेशन कार्यों की गति बढ़ाई जाए। जरूरत पड़ने पर वैकल्पिक उत्पादकों और आपूर्तिकर्ताओं से सामग्री खरीदने की प्रक्रिया अपनाई जाए, ताकि परियोजना की रफ्तार बनी रहे और तय समय-सीमा में काम पूरा हो सके।

स्थानीय वार्ड कार्यालय और ट्रैफिक पुलिस के समन्वय से निर्माण कार्य को तेज़ी से पूरा करने के प्रयास किए जा रहे हैं। निर्देश दिए गए हैं कि जहां संभव हो, दो काम एक साथ समानांतर रूप से किए जाएं, ताकि समय की बचत हो। साथ ही मानसून के दौरान भी काम न रुके, इस तरह की योजना बनाने पर ज़ोर दिया गया है।

इस मौके पर उप आयुक्त (पायाभूत सुविधा) गिरीश निकम, उप प्रमुख अभियंता (पुल) राजेश मुळ्ये समेत संबंधित विभागों के वरिष्ठ अधिकारी और अभियंता उपस्थित थे।

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