महाराष्ट्र की राजनीति एक बार फिर बड़े बदलाव के दौर से गुजर रही है। उपमुख्यमंत्री और एनसीपी प्रमुख अजित पवार के असमय निधन के बाद राज्य की सियासत में हलचल तेज हो गई है। अंतिम संस्कार के ठीक अगले दिन राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के वरिष्ठ नेताओं ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से मुलाकात कर आगे की राजनीतिक रणनीति पर चर्चा की।
सूत्रों के मुताबिक इस अहम बैठक में एनसीपी ने महायुति सरकार में अपनी भूमिका, नेतृत्व और अजित पवार के पास रहे अहम विभागों को लेकर साफ रुख रखा है। प्रफुल्ल पटेल, छगन भुजबल और सुनील तटकरे ने मुख्यमंत्री से मुलाकात कर पार्टी की सामूहिक राय से उन्हें अवगत कराया।

बताया जा रहा है कि एनसीपी डिप्टी सीएम पद के साथ-साथ वित्त, नियोजन और आबकारी जैसे महत्वपूर्ण विभागों पर भी अपना दावा जता रही है, जो पहले अजित पवार के पास थे। पार्टी के भीतर सुनेत्रा पवार के नाम पर सहमति बनती नजर आ रही है। सुनेत्रा पवार वर्तमान में राज्यसभा सांसद हैं और यदि वे डिप्टी सीएम पद स्वीकार करती हैं तो बारामती सीट से विधानसभा चुनाव लड़ने का विकल्प भी खुला रहेगा।
अजित पवार के निधन से एनसीपी को न सिर्फ भावनात्मक झटका लगा है, बल्कि नेतृत्व का बड़ा खालीपन भी पैदा हुआ है। ऐसे में पार्टी पवार परिवार से जुड़े चेहरे को आगे लाकर कार्यकर्ताओं और विधायकों को एकजुट रखने की कोशिश में है। गौरतलब है कि विधानसभा में अजित पवार गुट की एनसीपी के पास करीब 40 विधायक हैं, जिससे पार्टी का सियासी वजन कम नहीं हुआ है।
वहीं मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की ओर से फिलहाल इस मुलाकात पर कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है। लेकिन माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में महायुति सरकार के भीतर डिप्टी सीएम पद और मंत्रालयों के बंटवारे को लेकर बड़ा फैसला लिया जा सकता है। महाराष्ट्र की राजनीति में यह फैसला सरकार और गठबंधन दोनों के भविष्य के लिए बेहद अहम माना जा रहा है।