Home राज्यमहाराष्ट्र में पीएम-ई-बस योजना कागज़ों तक सीमित, 22 शहरों को मंजूरी के बावजूद एक भी ई-बस सड़कों पर नहीं – वर्षा गायकवाड

महाराष्ट्र में पीएम-ई-बस योजना कागज़ों तक सीमित, 22 शहरों को मंजूरी के बावजूद एक भी ई-बस सड़कों पर नहीं – वर्षा गायकवाड

by ashishppandya90@gmail.com
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नई दिल्ली। केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी पीएम-ई-बस सेवा योजना को लेकर महाराष्ट्र में जमीनी हकीकत सामने आ गई है। कांग्रेस सांसद वर्षा गायकवाड द्वारा लोकसभा में पूछे गए सवाल के जवाब में सरकार ने स्वीकार किया है कि महाराष्ट्र में इस योजना के तहत अब तक एक भी इलेक्ट्रिक बस सड़कों पर नहीं उतरी है, जबकि 22 शहरों के लिए 1,609 ई-बसों को मंजूरी दी जा चुकी है।


सरकारी जवाब के अनुसार, स्वीकृत 1,609 ई-बसों में से 1,411 बसों के लिए निविदा प्रक्रिया पूरी की जा चुकी है, लेकिन इसके बावजूद एक भी बस अभी तक यात्री सेवा में शामिल नहीं हो पाई है। इसे लेकर कांग्रेस सांसद वर्षा गायकवाड ने मोदी सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि पीएम-ई-बस योजना महाराष्ट्र के लिए सिर्फ कागज़ों तक सीमित रह गई है।
वर्षा गायकवाड ने अपने सवालों में महाराष्ट्र में योजना की मौजूदा स्थिति, शामिल शहरों की संख्या, स्वीकृत और निविदा जारी बसों का विवरण, और अब तक सेवाओं में शामिल बसों की संख्या पूछी थी। इसके साथ ही उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि क्या केंद्र सरकार ने ई-बसों के संचालन के लिए चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर, डिपो की तैयारियों और बिजली की उपलब्धता की पर्याप्त जांच की है या नहीं, और इस योजना से यात्रियों को वास्तविक रूप से क्या लाभ मिलने वाला है।

नगर विकास मंत्रालय ने लिखित जवाब में बताया कि पीएम-ई-बस सेवा योजना के तहत ‘बिहाइंड-द-मीटर’ (BTM) इलेक्ट्रिकल और सिविल डिपो इंफ्रास्ट्रक्चर के विकास के लिए 370.49 करोड़ रुपये मंजूर किए गए हैं। इनमें से अब तक 200.18 करोड़ रुपये की राशि जारी की जा चुकी है। मंत्रालय के अनुसार, प्रोजेक्ट मॉनिटरिंग एंड इवैल्यूएशन कमेटी (PMEC) और सेंट्रल स्टीयरिंग एंड अप्रूवल कमेटी (CSAC) के माध्यम से राज्यों द्वारा भेजे गए प्रस्तावों का मूल्यांकन किया जाता है।
सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि पीएम-ई-बस सेवा योजना का उद्देश्य देश के 100 से अधिक शहरों में 10,000 एयर-कंडीशंड इलेक्ट्रिक बसें शुरू करना है, ताकि शहरी परिवहन को स्वच्छ, स्मार्ट और अधिक समावेशी बनाया जा सके। इस योजना में 3 से 40 लाख आबादी वाले शहरों के साथ-साथ 3 लाख से कम आबादी वाले राज्यों की राजधानियां और पूर्वोत्तर व पहाड़ी क्षेत्रों की राजधानियां भी शामिल हैं।
हालांकि, महाराष्ट्र के संदर्भ में सामने आए आंकड़ों ने योजना के क्रियान्वयन पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। विपक्ष का आरोप है कि बड़े-बड़े दावों के बावजूद केंद्र सरकार योजनाओं को ज़मीन पर उतारने में विफल रही है, और इसका खामियाजा आम यात्रियों को भुगतना पड़ रहा है, जिन्हें अब भी आधुनिक और पर्यावरण के अनुकूल सार्वजनिक परिवहन का इंतजार है।

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