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महाराष्ट्र में उद्योगों के लिए देश की पहली ‘एआई लिविंग लैब’ शुरू, जर्मनी के सहयोग से तकनीकी क्रांति की पहल

by ashishppandya90@gmail.com
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महाराष्ट्र में उद्योगों और लघु उद्योगों को तकनीकी रूप से सशक्त बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया गया है। राज्य में देश की पहली ‘एआई लिविंग लैब’ की शुरुआत की गई है। इस अत्याधुनिक लैब का उद्घाटन महाराष्ट्र के कौशल विकास मंत्री मंगलप्रभात लोढा ने महाराष्ट्र राज्य रतन टाटा कौशल विश्वविद्यालय के मुख्यालय में किया।


यह अभिनव परियोजना जर्मनी के सहयोग से शुरू की गई है, जिसका उद्देश्य उद्योग, शिक्षा और सरकार के बीच समन्वय स्थापित कर कृत्रिम बुद्धिमत्ता यानी एआई के माध्यम से औद्योगिक समस्याओं का व्यावहारिक समाधान विकसित करना है। उद्घाटन समारोह के दौरान ‘एआई लिविंग लैब’ से संबंधित विभिन्न समझौता ज्ञापनों पर हस्ताक्षर भी किए गए।
कार्यक्रम में जर्मनी की संसदीय राज्य मंत्री डॉ. बार्बेल कॉफ्लर, राज्य के मुख्य सचिव राजेश अग्रवाल, कौशल विभाग की अपर मुख्य सचिव मनीषा वर्मा, कुलगुरु डॉ. अपूर्वा पालकर, जर्मनी के वाणिज्य दूत क्रिस्टॉप हेलिर तथा जीआईजेड के संचालक उल्करे एबेलिंग सहित कई गणमान्य उपस्थित रहे।

इस अवसर पर मंत्री मंगलप्रभात लोढा ने कहा कि प्राचीन भारत में उन्नत तकनीक के बल पर छोटे-छोटे उद्योगों ने देश को समृद्ध बनाया था। उन्होंने कहा कि स्वदेशी की अवधारणा को आगे बढ़ाते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में आधुनिक तकनीक को अपनाकर भारतीय उद्योगों को वैश्विक प्रतिस्पर्धा के लिए तैयार किया जा रहा है। जर्मनी के सहयोग से शुरू हुई यह ‘एआई लिविंग लैब’ स्वदेशी उद्योगों को तकनीकी मजबूती प्रदान करेगी और भारत को वैश्विक नेतृत्व की दिशा में आगे बढ़ाएगी।
उन्होंने यह भी कहा कि मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के मार्गदर्शन में राज्य में कौशल विकास की योजनाएं प्रभावी रूप से लागू की जा रही हैं, जिससे युवाओं को रोजगार और स्वरोजगार के अवसर मिल रहे हैं।
जर्मनी की संसदीय राज्य मंत्री डॉ. बार्बेल कॉफ्लर ने कहा कि एआई मानव भविष्य को आकार देने वाली प्रमुख तकनीक है। इसके सही उपयोग से विज्ञान, स्वास्थ्य, शिक्षा और उद्योग क्षेत्र में व्यापक परिवर्तन संभव हैं। उन्होंने बताया कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एआई अनुसंधान में बड़े पैमाने पर निवेश हो रहा है और लाखों विशेषज्ञ इस क्षेत्र में कार्यरत हैं।

राज्य के मुख्य सचिव राजेश अग्रवाल ने कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता एक नई औद्योगिक क्रांति के समान है, जो अब विकल्प नहीं बल्कि आवश्यकता बन चुकी है। इससे वैश्विक अर्थव्यवस्था की कार्यप्रणाली में मूलभूत परिवर्तन हो रहे हैं और नई पीढ़ी इसमें अपार संभावनाएं देख रही है।
विश्वविद्यालय की कुलगुरु डॉ. अपूर्वा पालकर ने जानकारी दी कि ‘लिविंग लैब’ की अवधारणा विद्यार्थियों को उद्योग की वास्तविक चुनौतियों पर काम करने का अवसर देती है। इसमें विद्यार्थी, प्राध्यापक और उद्योग विशेषज्ञ मिलकर समस्याओं का विश्लेषण कर व्यवहारिक समाधान तैयार करेंगे। जर्मनी की पांच कंपनियां इस परियोजना में तकनीकी सहयोग देंगी।
यह परियोजना जर्मनी के लिपजिग विश्वविद्यालय, SEPT कॉम्पिटेंस और महाराष्ट्र राज्य रतन टाटा कौशल विश्वविद्यालय के संयुक्त सहयोग से लागू की जा रही है। साथ ही महाराष्ट्र की अक्युरेट इंडस्ट्रियल कंट्रोल्स लिमिटेड, लाइटेक्स इलेक्ट्रिकल, अश्विनी मैग्नेट्स और पीएमटी मशीन जैसी कंपनियों ने भी विश्वविद्यालय के साथ सहयोग समझौते किए हैं।
‘एआई लिविंग लैब’ के माध्यम से औद्योगिक समस्याओं के समाधान, तकनीकी नवाचार और भविष्य की औद्योगिक रणनीतियों के निर्माण को नई दिशा मिलने की उम्मीद है। यह पहल महाराष्ट्र को तकनीकी नवाचार के क्षेत्र में अग्रणी बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

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