मुंबई :भाषा और पहचान की राजनीति को लेकर महाराष्ट्र की सियासत एक बार फिर गरमा गई है। शिवसेना के उपनेता एवं प्रवक्ता संजय निरुपम ने मनसे प्रमुख राज ठाकरे और उनके कार्यकर्ताओं पर तीखा हमला बोलते हुए कहा है कि भाषा के नाम पर आतंक फैलाने वालों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए।
अंधेरी में आयोजित प्रेस वार्ता में निरुपम ने नासिक स्थित कोचिंग संस्थान फिजिक्स वाला में मराठी भाषा को लेकर हुए विवाद और कथित मारपीट की घटना की कड़ी निंदा की। उन्होंने आरोप लगाया कि हाल ही में नियुक्त शिक्षकों पर जबरन मराठी बोलने का दबाव बनाया गया और विरोध करने पर उनके साथ मारपीट की गई। निरुपम ने इसे “भाषा के नाम पर गुंडागर्दी” करार देते हुए कहा कि यह लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए खतरनाक है।
उन्होंने नासिक पुलिस से मामले की गंभीर और त्वरित जांच की मांग की। साथ ही यह भी आरोप लगाया कि मनसे कार्यकर्ताओं द्वारा कोचिंग संस्थान के मालिक से कथित रूप से हफ्ता वसूली की जा रही थी। निरुपम ने कहा कि यदि जांच में ये आरोप सही पाए जाते हैं तो दोषियों के खिलाफ मकोका के तहत कार्रवाई की जानी चाहिए।
संजय निरुपम ने स्पष्ट किया कि वे मराठी भाषा के विरोधी नहीं हैं। उनके अनुसार मराठी महाराष्ट्र की मातृभाषा है और सभी को उसका सम्मान करना चाहिए। लेकिन भाषा के नाम पर हिंसा और नफरत की राजनीति किसी भी सूरत में स्वीकार्य नहीं है। उन्होंने कहा कि महायुति सरकार ने मराठी को अभिजात भाषा का दर्जा दिलाया है, इसलिए इस मुद्दे पर राजनीति करने वालों को जनता पहले ही सबक सिखा चुकी है।

परभणी नगर निगम की राजनीति का जिक्र करते हुए निरुपम ने उद्धव ठाकरे गुट पर भी निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि परभणी में कांग्रेस के साथ मिलकर मुस्लिम महापौर बनाए जाने से कथित “मुस्लिम-प्रेम” उजागर हो गया है। उन्होंने सवाल उठाया कि जब मुंबई में मराठी महापौर का नारा दिया गया, तो परभणी में अलग रुख क्यों अपनाया गया।

निरुपम ने कहा कि शिवसेना संस्थापक बालासाहेब ठाकरे के विचारों से समझौता किया जा रहा है। वहीं उन्होंने दावा किया कि महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे बालासाहेब की विरासत और हिंदुत्व की विचारधारा को आगे बढ़ा रहे हैं।
प्रेस वार्ता के दौरान निरुपम ने मुंबई में कथित बांग्लादेशी घुसपैठियों के खिलाफ भी सख्त कार्रवाई की मांग की।
भाषा, पहचान और वोट बैंक की राजनीति के बीच महाराष्ट्र में आरोप-प्रत्यारोप का यह दौर तेज होता दिख रहा है। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर सियासी बयानबाज़ी और तेज होने के संकेत हैं।