भारत और यूरोपियन यूनियन के बीच हुए ऐतिहासिक फ्री ट्रेड एग्रीमेंट ने पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था की चिंता बढ़ा दी है। पाकिस्तान में इस डील को लेकर सियासी और कारोबारी हलकों में हड़कंप मचा हुआ है। वहां के नेताओं और उद्योग संगठनों का दावा है कि भारत-EU समझौते से पाकिस्तान में करीब एक करोड़ नौकरियां खतरे में पड़ सकती हैं और देश को अरबों डॉलर के नुकसान का सामना करना पड़ सकता है।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक पाकिस्तान सरकार ने इस मुद्दे पर EU अधिकारियों से संपर्क साधा है, ताकि यह समझा जा सके कि भारत-EU FTA का असर उसके निर्यात पर कितना गहरा होगा। पाकिस्तान के पूर्व वाणिज्य मंत्री गोहर एजाज ने सोशल मीडिया पर खुलकर चिंता जाहिर करते हुए कहा कि EU के साथ पाकिस्तान का ‘जीरो-टैरिफ हनीमून’ अब खत्म हो चुका है। उन्होंने सरकार से मांग की कि उद्योगों को सस्ती बिजली, कम टैक्स और आसान कर्ज दिया जाए, ताकि वे भारत और अन्य देशों की इंडस्ट्री से मुकाबला कर सकें।

पाकिस्तान की सबसे बड़ी चिंता यूरोपीय बाजार को लेकर है। लंबे समय से उसे EU की GSP प्लस योजना के तहत करीब 66 प्रतिशत उत्पादों को बिना टैक्स यूरोप भेजने की सुविधा मिलती रही है। इसमें टेक्सटाइल और रेडीमेड गारमेंट्स जैसे अहम सेक्टर शामिल हैं। इसी वजह से यूरोपीय बाजार में पाकिस्तान को भारत पर बढ़त हासिल थी।
हालांकि अब भारत और EU के बीच हुआ फ्री ट्रेड एग्रीमेंट, जिसे ‘मदर ऑफ ऑल डील्स’ कहा जा रहा है, इस समीकरण को पूरी तरह बदलने वाला है। इस समझौते के तहत भारत के लगभग 95 प्रतिशत लेबर-बेस्ड प्रोडक्ट्स को यूरोप में बिना टैक्स पहुंच मिलेगी। इससे यूरोपीय बाजार में भारत की प्रतिस्पर्धा कई गुना बढ़ जाएगी और पाकिस्तान की अब तक की बढ़त लगभग खत्म हो सकती है।

आंकड़े बताते हैं कि अब तक पाकिस्तान का टेक्सटाइल एक्सपोर्ट यूरोप में 6.2 अरब डॉलर का रहा है, जबकि भारत का टेक्सटाइल एक्सपोर्ट 5.6 अरब डॉलर था। लेकिन टैक्स में बराबरी होते ही यह अंतर तेजी से पलट सकता है।
पाकिस्तान के लिए मुश्किल यह भी है कि उसकी GSP प्लस सुविधा दिसंबर 2027 में खत्म होने वाली है। अगर EU ने इसे आगे नहीं बढ़ाया, तो पाकिस्तान को मिलने वाली यह विशेष व्यापार सुविधा पूरी तरह समाप्त हो सकती है। यही वजह है कि पाकिस्तान लगातार ब्रसेल्स स्थित EU मुख्यालय और सदस्य देशों से संपर्क में है।
पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय का कहना है कि GSP प्लस योजना EU और पाकिस्तान दोनों के लिए फायदेमंद रही है, क्योंकि इससे यूरोप को सस्ते कपड़े और रेडीमेड उत्पादों की नियमित आपूर्ति मिलती रही है। लेकिन भारत-EU डील के बाद यह तर्क कितना कारगर रहेगा, इस पर सवाल उठने लगे हैं।
कुल मिलाकर, भारत-EU फ्री ट्रेड एग्रीमेंट को भारत के लिए बड़ी आर्थिक जीत माना जा रहा है, जबकि पाकिस्तान के लिए यह डील खतरे की घंटी बनकर सामने आई है। अब सबकी नजर इस पर है कि पाकिस्तान इस बदले हुए वैश्विक ट्रेड समीकरण में खुद को कैसे संभाल पाता