Home दुनियाबांग्लादेश में हिंदू युवक को जिंदा जलाकर हत्या, चुनावी माहौल में बढ़ती अल्पसंख्यक हिंसा ने बढ़ाई चिंता

बांग्लादेश में हिंदू युवक को जिंदा जलाकर हत्या, चुनावी माहौल में बढ़ती अल्पसंख्यक हिंसा ने बढ़ाई चिंता

by ashishppandya90@gmail.com
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बांग्लादेश में चुनावी सरगर्मियों के बीच हिंदू अल्पसंख्यकों के खिलाफ हिंसा की घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं। ताजा मामला नरसिंदी जिले का है, जहां 23 वर्षीय हिंदू युवक चंचल भौमिक की बेहद निर्मम तरीके से हत्या कर दी गई। चंचल शुक्रवार रात अपनी ही दुकान से जुड़े गैरेज में सो रहा था, तभी हमलावरों ने बाहर से शटर बंद कर दिया, पेट्रोल छिड़का और आग लगा दी। आग की लपटों में घिरे चंचल की चीखें सुनकर भी हमलावर मौके से नहीं हटे और तब तक डटे रहे, जब तक उसकी मौत नहीं हो गई।

परिजनों के मुताबिक चंचल अपने परिवार का एकमात्र सहारा था। उसके कंधों पर बीमार मां और दिव्यांग भाई की जिम्मेदारी थी। पड़ोसियों का कहना है कि चंचल शांत स्वभाव का, मेहनती युवक था और उसकी किसी से कोई दुश्मनी नहीं थी। परिवार ने इस घटना को साधारण अपराध मानने से इनकार करते हुए इसे धार्मिक नफरत से प्रेरित सोची-समझी हत्या बताया है।

यह घटना कोई अकेला मामला नहीं है। इससे पहले भी बांग्लादेश में हिंदू युवकों को निशाना बनाए जाने की कई घटनाएं सामने आ चुकी हैं। दीपु चंद्र दास और खोकोन चंद्र दास जैसे मामलों ने पहले ही अल्पसंख्यकों की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

इस बीच कट्टरपंथी बयानों ने माहौल को और भड़काने का काम किया है। जमात-ए-इस्लामी से जुड़े नेता और बरगुना-2 सीट से उम्मीदवार अफजल हुसैन के हालिया बयान विवादों में हैं। एक चुनावी सभा के दौरान उन्होंने कहा कि 80 प्रतिशत मुस्लिम आबादी वाले देश की संसद में गैर-मुस्लिमों के लिए कोई जगह नहीं होनी चाहिए। इतना ही नहीं, उन्होंने संविधान को खारिज करते हुए मध्ययुगीन दंड व्यवस्था लागू करने की भी वकालत की, जिससे अल्पसंख्यक समुदाय में डर और असुरक्षा का माहौल और गहरा गया है।

हिंसा की एक और घटना एक सप्ताह पहले गाजीपुर में सामने आई थी, जहां मामूली विवाद के बाद एक हिंदू व्यवसायी की पीट-पीटकर हत्या कर दी गई। मृतक की पहचान ‘बैशाखी स्वीटमीट एंड होटल’ के मालिक लिटन चंद्र घोष के रूप में हुई। पुलिस के अनुसार, केले के एक गुच्छे को लेकर हुए विवाद में आरोपी स्वपन मियां, उसकी पत्नी माजेदा खातून और बेटे मासूम मियां ने लिटन पर हमला कर दिया। गंभीर चोटों के कारण लिटन की मौके पर ही मौत हो गई। तीनों आरोपियों को हिरासत में लिया गया है।

लगातार हो रही इन घटनाओं ने बांग्लादेश में हिंदू अल्पसंख्यकों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। चुनावी माहौल में बढ़ती हिंसा और नफरत भरे बयानों ने न सिर्फ सामाजिक ताने-बाने को झकझोर दिया है, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी बांग्लादेश की छवि पर असर डालने की आशंका बढ़ा दी है।

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