Home स्पोर्ट्सक्रिकेटबांग्लादेश बाहर, स्कॉटलैंड अंदर: आईसीसी के सख्त अनुपालन नियमों ने बदली टी20 विश्व कप 2026 की तस्वीर

बांग्लादेश बाहर, स्कॉटलैंड अंदर: आईसीसी के सख्त अनुपालन नियमों ने बदली टी20 विश्व कप 2026 की तस्वीर

by ashishppandya90@gmail.com
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टी20 विश्व कप 2026 को लेकर आईसीसी का रुख एक बार फिर साफ हो गया है। बांग्लादेश को टूर्नामेंट से बाहर कर दिया गया है, जबकि स्कॉटलैंड को शामिल किया गया है। यह फैसला भावनात्मक या राजनीतिक दबाव में नहीं, बल्कि आईसीसी के सख्त अनुपालन नियमों के तहत लिया गया है। आईसीसी ने संकेत दे दिया है कि वैश्विक टूर्नामेंट किसी एक टीम के इर्द-गिर्द नहीं चलते, बल्कि तय नियमों, समय-सीमा और प्रशासनिक स्पष्टता पर आधारित होते हैं।

क्रिकेट के इतिहास में यह पहली बार नहीं है जब ऐसे कठोर फैसले लिए गए हों। 1996 के वनडे विश्व कप में सुरक्षा कारणों से ऑस्ट्रेलिया और वेस्ट इंडीज ने श्रीलंका का दौरा करने से इनकार किया था। आईसीसी ने न तो कार्यक्रम बदला और न ही स्थल बदले, बल्कि श्रीलंका को वॉकओवर दे दिया गया। वही वॉकओवर आगे चलकर श्रीलंका की विश्व कप जीत की नींव साबित हुआ।

इसी तरह 2003 विश्व कप में इंग्लैंड ने जिम्बाब्वे और न्यूजीलैंड ने केन्या में खेलने से इनकार किया। उस समय भी आईसीसी ने अंक आवंटित किए और टूर्नामेंट को बिना बाधा आगे बढ़ाया। संदेश स्पष्ट था एक या दो मैच रद्द हो सकते हैं, लेकिन पूरे टूर्नामेंट की संरचना से समझौता नहीं किया जाएगा।

जब कोई टीम टूर्नामेंट शुरू होने से पहले ही नाम वापस ले लेती है, तब आईसीसी का रुख और भी कठोर हो जाता है। 2009 विश्व टी20 से वीजा समस्याओं के कारण जिम्बाब्वे का हटना और अंडर-19 विश्व कप से सुरक्षा कारणों के चलते ऑस्ट्रेलिया का नाम वापस लेना, ऐसे ही उदाहरण हैं। इन मामलों में भी आईसीसी ने विकल्प तलाशे और आयोजन को प्राथमिकता दी।

बांग्लादेश के बाहर होने और स्कॉटलैंड के अंदर आने का फैसला इसी नीति का विस्तार है। आईसीसी यह साफ कर चुका है कि किसी भी वैश्विक टूर्नामेंट में अनिश्चितता की कोई जगह नहीं है। जो टीम नियमों और तय मानकों पर खरी नहीं उतरती, उसकी जगह तैयार विकल्प को मौका दिया जाएगा।

टी20 विश्व कप 2026 का यह फैसला एक बार फिर साबित करता है कि अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में भावनाओं से ज्यादा अहमियत अब अनुपालन, समयबद्धता और टूर्नामेंट की अखंडता को दी जाती है।

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