केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने आज लोकसभा में केंद्रीय बजट 2026-27 पेश किया। यह उनका लगातार नौवां बजट है, जबकि मोदी सरकार का 15वां पूर्ण बजट। बजट भाषण की शुरुआत करते हुए वित्त मंत्री ने कहा कि बीते 12 वर्षों में भारत की अर्थव्यवस्था ने स्थिरता और वित्तीय अनुशासन के साथ मजबूत दिशा पकड़ी है और इस दौरान देश ने औसतन 7 प्रतिशत की विकास दर हासिल की है।

वित्त मंत्री ने माघ पूर्णिमा और गुरु रविदास जयंती के पावन अवसर का उल्लेख करते हुए कहा कि सरकार का लक्ष्य संतुलित विकास के साथ मजबूत आर्थिक नींव को और सुदृढ़ करना है। उन्होंने कहा कि मौजूदा सरकार के कार्यकाल में आर्थिक स्थिरता बनी रही, सरकारी खर्च और राजकोषीय घाटे पर नियंत्रण रखा गया और महंगाई सीमित दायरे में रही।
बजट 2026-27 में सरकार का मुख्य फोकस ‘विकसित भारत 2047’ विजन पर है। इसके तहत इंफ्रास्ट्रक्चर, मैन्युफैक्चरिंग, एक्सपोर्ट, ग्रामीण विकास और रोजगार सृजन को प्राथमिकता दिए जाने की बात कही गई है। साथ ही, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और नई तकनीकों के जरिए अर्थव्यवस्था को गति देने पर भी जोर दिया गया है।
बजट से पहले ही आर्थिक मोर्चे पर हलचल तेज हो गई थी। वैश्विक बाजारों के दबाव और भारी प्रॉफिट बुकिंग के चलते शेयर बाजार में गिरावट देखने को मिली, जबकि सोना-चांदी की कीमतों में भी तेज उतार-चढ़ाव रहा। ऐसे में निवेशकों और कारोबार जगत की नजरें बजट के हर ऐलान पर टिकी हुई हैं।

इस बजट से मिडिल क्लास और आम लोगों को महंगाई से राहत मिलने की उम्मीद है। रोजमर्रा की जरूरी वस्तुओं पर टैक्स में कटौती और टैक्स सिस्टम को सरल बनाने जैसे कदमों की संभावना जताई जा रही है, ताकि आम आदमी की जेब पर बोझ कम हो सके। कुल मिलाकर, बजट 2026 को सरकार आने वाले 25 वर्षों के भारत की दिशा तय करने वाले अहम दस्तावेज के तौर पर पेश कर रही है।