Home देशबंगाल में ED की कार्रवाई पर सियासी घमासान, अखिलेश यादव ने BJP की हार की भविष्यवाणी

बंगाल में ED की कार्रवाई पर सियासी घमासान, अखिलेश यादव ने BJP की हार की भविष्यवाणी

by ashishppandya90@gmail.com
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पश्चिम बंगाल में प्रवर्तन निदेशालय की कार्रवाई ने एक बार फिर देश की राजनीति को गरमा दिया है। कोलकाता में राजनीतिक परामर्श फर्म आई-पीएसी और उसके निदेशक प्रतीक जैन के ठिकानों पर ईडी की छापेमारी के बाद विपक्ष ने केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला है।

समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने इस कार्रवाई को लेकर भारतीय जनता पार्टी पर सीधा निशाना साधते हुए बड़ी राजनीतिक भविष्यवाणी कर दी है।
अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर प्रतिक्रिया देते हुए लिखा कि भाजपा बंगाल में बुरी तरह हार रही है और यह कार्रवाई उसी का पहला प्रमाण है। सपा प्रमुख ने सवाल उठाया कि क्या केंद्रीय एजेंसियों का इस्तेमाल राजनीतिक दबाव बनाने के लिए किया जा रहा है। उनके इस बयान के बाद उत्तर से लेकर पूर्व तक सियासी बयानबाजी तेज हो गई है।
दरअसल, प्रवर्तन निदेशालय ने बृहस्पतिवार को धनशोधन मामले की जांच के तहत कोलकाता में आई-पीएसी और इसके निदेशक प्रतीक जैन के परिसरों पर तलाशी अभियान चलाया।

आधिकारिक सूत्रों के मुताबिक प्रतीक जैन ‘इंडियन पॉलिटिकल एक्शन कमेटी’ के सह-संस्थापक हैं और पश्चिम बंगाल में सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस के आईटी प्रकोष्ठ के प्रमुख भी हैं। एजेंसी ने इस दौरान कुछ अन्य ठिकानों पर भी तलाशी ली।

ईडी की इस कार्रवाई के बीच पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी स्वयं प्रतीक जैन के आवास पर पहुंचीं और छापेमारी की कड़ी निंदा की। ममता बनर्जी ने आरोप लगाया कि केंद्रीय एजेंसी तृणमूल कांग्रेस के आंतरिक दस्तावेजों, हार्ड डिस्क और संवेदनशील डिजिटल डाटा को जब्त करने की कोशिश कर रही थी। उन्होंने इसे पूरी तरह राजनीतिक रूप से प्रेरित और असंवैधानिक करार दिया। ममता बनर्जी ने कहा कि यह कार्रवाई लोकतंत्र पर हमला है और विपक्षी दलों को डराने की कोशिश है।

वहीं, दूसरी ओर पश्चिम बंगाल विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष शुभेंदु अधिकारी ने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के इस कदम पर कड़ी आपत्ति जताई है। शुभेंदु अधिकारी ने कहा कि ईडी की छापेमारी के दौरान मुख्यमंत्री का मौके पर पहुंचना असंवैधानिक है और यह केंद्रीय एजेंसी की जांच में सीधा हस्तक्षेप है। उन्होंने मांग की कि कानून के अनुसार इस मामले में मुख्यमंत्री के खिलाफ भी कार्रवाई होनी चाहिए।


गौरतलब है कि आई-पीएसी की स्थापना राजनीतिक रणनीतिकार प्रशांत किशोर ने 2014 के लोकसभा चुनाव से पहले की थी। 2019 के लोकसभा चुनाव के बाद इस फर्म ने तृणमूल कांग्रेस और पश्चिम बंगाल सरकार के साथ मिलकर काम किया था। अब ईडी की कार्रवाई और उस पर हो रही तीखी राजनीतिक प्रतिक्रियाओं ने बंगाल की राजनीति में नया विवाद खड़ा कर दिया है।


कुल मिलाकर, ईडी की छापेमारी के बाद अखिलेश यादव की टिप्पणी, ममता बनर्जी की नाराज़गी और भाजपा की पलटवार ने इस मुद्दे को राष्ट्रीय राजनीति के केंद्र में ला दिया है। आने वाले दिनों में यह सियासी टकराव और तेज होने के आसार हैं।

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