महाराष्ट्र के पुणे जिला परिषद चुनाव में राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी यानी एनसीपी ने शानदार प्रदर्शन करते हुए जिले की राजनीति में अपना दबदबा कायम रखा है। अजित पवार के नेतृत्व वाली एनसीपी ने 73 में से 72 सीटों पर चुनाव लड़ते हुए 51 सीटों पर जीत दर्ज की है। इस जीत ने साफ कर दिया है कि पुणे जिले में पार्टी की पकड़ अब भी मजबूत बनी हुई है।
जिले के कई अहम तालुकों में एनसीपी को जबरदस्त समर्थन मिला है। बारामती और इंदापुर में पार्टी ने सभी सीटों पर जीत हासिल कर क्लीन स्वीप किया है। इसके अलावा जुन्नार में 7 में से 4, अम्बेगांव में 5 में से 3, शिरुर में 7 में से 4, खेड़ में 8 में से 3, मावल में 5 में से 5, मुलशी में 3 में से 2, हवेली में 6 में से 4, दौंड में 4 में से 2, पुरंदर में 4 में से 2, राजगढ़ में 2 में से 2 और भोर में 4 में से 2 सीटों पर एनसीपी उम्मीदवारों ने जीत दर्ज की है।

इन नतीजों के सामने आने के बाद पार्टी कार्यकर्ताओं और समर्थकों को अजित पवार का वह चर्चित बयान याद आ रहा है, जिसमें उन्होंने कहा था—“देखो जिला किसके पीछे खड़ा है।” चुनाव परिणामों ने इस बयान को फिर से चर्चा में ला दिया है।
गौरतलब है कि जिला परिषद चुनाव से पहले 28 जनवरी को प्रचार के दौरान हुए विमान हादसे में अजित पवार का निधन हो गया था। उनके निधन के बाद एनसीपी ने बड़े सार्वजनिक कार्यक्रम और सभाएं नहीं कीं। पार्टी ने घर-घर संपर्क अभियान और पर्चे बांटकर ही चुनाव प्रचार किया। इसके बावजूद पार्टी को मिली बड़ी जीत को कार्यकर्ता अजित पवार के प्रति जनता के भरोसे और भावनात्मक जुड़ाव से जोड़कर देख रहे हैं।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि पुणे जिला परिषद के नतीजे आगामी स्थानीय निकाय और महानगरपालिका चुनावों के लिए भी अहम संकेत दे सकते हैं। एनसीपी की इस जीत ने पार्टी संगठन की मजबूती और क्षेत्र में उसकी सियासी पकड़ को एक बार फिर साबित कर दिया है।