मुंबई: राष्ट्रवादी कांग्रेस शरदचंद्र पवार पार्टी के वरिष्ठ नेता और पूर्व गृहमंत्री अनिल देशमुख ने पूर्व मुंबई पुलिस आयुक्त परमबीर सिंह पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि जिस परमबीर सिंह ने उन पर झूठे आरोप लगाकर बदनाम करने की साजिश रची थी, आज उसके कथित भ्रष्ट कारनामे एक-एक कर सामने आ रहे हैं।

देशमुख ने मुंबई में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि मुंबई के प्रसिद्ध लीलावती अस्पताल से परमबीर सिंह को अपमानजनक तरीके से हटाया जाना इस बात का संकेत है कि उनके खिलाफ गंभीर आरोप हैं। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, उन पर अस्पताल के डॉक्टरों से पदोन्नति के लिए कथित तौर पर 25-25 लाख रुपये वसूलने की कोशिश करने के आरोप लगे हैं। इन आरोपों और कथित अनियमितताओं के चलते अस्पताल प्रशासन ने उन्हें पद से हटा दिया।

अनिल देशमुख ने ‘अंतिलिया’ प्रकरण का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि जब उद्योगपति मुकेश अंबानी के निवास ‘एंटिलिया’ के बाहर विस्फोटक सामग्री मिलने की घटना हुई थी, उस समय परमबीर सिंह सरकार को गुमराह कर रहे थे। जांच पर संदेह होने के बाद यह मामला एटीएस को सौंपा गया। देशमुख का दावा है कि एटीएस की जांच में परमबीर सिंह की भूमिका को लेकर गंभीर संकेत मिले थे, जिसके बाद उनका तबादला किया गया और आगे चलकर उन्हें सेवा से बर्खास्त कर दिया गया।
देशमुख ने यह भी कहा कि बर्खास्तगी की कार्रवाई से बचने के लिए परमबीर सिंह ने उन पर 100 करोड़ रुपये की उगाही का झूठा आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि आरोप लगते ही उन्होंने निष्पक्ष जांच की मांग की थी। हाईकोर्ट के निर्देश पर गठित न्यायमूर्ति चांदीवाल समिति के समक्ष पेश होने के लिए कई बार समन जारी किए गए, लेकिन परमबीर सिंह उपस्थित नहीं हुए। बाद में उन्होंने हलफनामा दाखिल कर यह स्वीकार किया कि उनके पास अनिल देशमुख के खिलाफ कोई ठोस सबूत नहीं है।
देशमुख ने मांग की कि लीलावती अस्पताल से जुड़े पूरे प्रकरण की निष्पक्ष और विस्तृत जांच होनी चाहिए, ताकि सच्चाई सामने आ सके। उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र की जनता के सामने अब परमबीर सिंह की वास्तविकता उजागर हो चुकी है।