महाराष्ट्र के नांदेड़ जिले से एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां प्रशासनिक लापरवाही का खामियाजा मासूम स्कूली बच्चों को भुगतना पड़ रहा है। मामला हदगांव तहसील के बंचिनचोली गांव का है, जहां ज़िला परिषद द्वारा बनाया गया स्कूल अब विवादों में घिर गया है।
जानकारी के मुताबिक, बंचिनचोली गांव में ज़िला परिषद का स्कूल वर्ष 1935 में बनाया गया था। इस स्कूल में पहली से सातवीं तक की कक्षाएं संचालित होती हैं और यहां कुल 129 छात्र-छात्राएं शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं। लेकिन हाल ही में आए कोर्ट के फैसले ने पूरे गांव को झटका दे दिया।
कोर्ट ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि जिस ज़मीन पर स्कूल बना है, वह ज़िला परिषद की नहीं बल्कि देवराव पौल नामक व्यक्ति की निजी संपत्ति है। देवराव पौल ने वर्ष 2014 में अदालत में दावा दायर कर कहा था कि स्कूल उनकी निजी जमीन पर बना है। लंबी कानूनी प्रक्रिया के बाद कोर्ट ने उनके पक्ष में फैसला सुनाया।

फैसले के तुरंत बाद ज़मीन के मालिक देवराव पौल ने कोर्ट के आदेश के आधार पर स्कूल भवन पर ताला लगा दिया। इसके चलते स्कूल में पढ़ने वाले 129 बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो गई है। वर्तमान में छात्र-छात्राएं खुले मैदान में बैठकर शिक्षा लेने को मजबूर हैं।
स्कूल प्रबंधन समिति के अध्यक्ष, स्थानीय ग्रामस्थों और शिक्षकों ने ज़िला परिषद प्रशासन की लापरवाही पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि यदि जमीन के दस्तावेजों की समय पर जांच की गई होती, तो आज यह स्थिति पैदा नहीं होती। ग्रामीणों ने सरकार और संबंधित प्रशासन से जल्द से जल्द वैकल्पिक व्यवस्था करने की मांग की है, ताकि बच्चों की पढ़ाई बाधित न हो।
अब बड़ा सवाल यह है कि क्या ज़िला परिषद प्रशासन इस मामले में कोई ठोस कदम उठाएगा? क्या स्कूल के लिए नई जगह उपलब्ध कराई जाएगी, या फिर कोई अन्य समाधान निकाला जाएगा? फिलहाल बंचिनचोली गांव के बच्चों का भविष्य प्रशासनिक फैसलों के बीच अधर में लटका हुआ है।