दावोस में आयोजित वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम से महाराष्ट्र के लिए बड़ी आर्थिक खुशख़बरी सामने आई है। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने जानकारी दी है कि दावोस में महाराष्ट्र सरकार ने अब तक 30 लाख करोड़ रुपये के सामंजस्य करार (MoU) किए हैं, जबकि 10 लाख करोड़ रुपये के अतिरिक्त निवेश को लेकर प्राथमिक बातचीत पूरी हो चुकी है। इन निवेशों के माध्यम से राज्य में करीब 40 लाख रोजगार के अवसर सृजित करने का लक्ष्य रखा गया है।
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने महाराष्ट्र के पत्रकारों से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के ज़रिये बातचीत करते हुए बताया कि इन समझौतों में 83 प्रतिशत निवेश प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) के रूप में है, जबकि 16 प्रतिशत निवेश विदेशी तकनीकी भागीदारी के तहत आएगा। कुल 18 देशों से महाराष्ट्र में निवेश प्रस्तावित है, जिनमें अमेरिका, ब्रिटेन, सिंगापुर, जापान, स्विट्ज़रलैंड, स्वीडन, नीदरलैंड, नॉर्वे, इटली, जर्मनी, फ्रांस, ऑस्ट्रिया, यूएई, स्पेन, कनाडा और बेल्जियम जैसे देश शामिल हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि औद्योगिक, सेवा, कृषि, तकनीक, स्वास्थ्य, डेटा सेंटर, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, क्वांटम कंप्यूटिंग, फिनटेक, ग्रीन स्टील, लॉजिस्टिक्स, डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर और शहरी विकास जैसे विविध क्षेत्रों में यह निवेश आएगा। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि महाराष्ट्र में हुए सामंजस्य करारों के ज़मीनी स्तर पर लागू होने की दर लगभग 75 प्रतिशत रही है और पिछले वर्ष किए गए करारों का बड़ा हिस्सा पहले ही साकार हो चुका है।
देवेंद्र फडणवीस ने बताया कि ये निवेश अगले 3 से 7 वर्षों के भीतर चरणबद्ध तरीके से धरातल पर उतरेंगे। एसबीजी, ब्रुकफील्ड, आर्सेलर मित्तल, इस्सार, स्कोडा ऑटो, फॉक्सवैगन, टाटा समूह, अडानी, रिलायंस, कोका-कोला, बॉश, कैपिटल लैंड और आयरन माउंटेन जैसी कई वैश्विक और भारतीय कंपनियों के साथ अहम समझौते किए गए हैं।

निवेश का क्षेत्रीय वितरण भी संतुलित रखा गया है। मुंबई महानगर क्षेत्र और कोकण में लगभग 22 प्रतिशत, विदर्भ में 13 प्रतिशत और शेष 50 प्रतिशत निवेश राज्य के अन्य हिस्सों में प्रस्तावित है। उत्तर महाराष्ट्र में नाशिक, जळगांव, धुले और अहिल्यानगर में करीब 50 हजार करोड़ रुपये, मराठवाड़ा के छत्रपति संभाजीनगर में 55 हजार करोड़, कोकण क्षेत्र में 3.5 लाख करोड़ और नागपुर-विदर्भ क्षेत्र में लगभग 2.7 लाख करोड़ रुपये का निवेश अपेक्षित है।
मुख्यमंत्री ने यह भी घोषणा की कि टाटा समूह के सहयोग से मुंबई के पास देश की पहली ‘इनोवेशन सिटी’ विकसित की जाएगी। इस परियोजना में 1 लाख करोड़ रुपये से अधिक का निवेश होगा और अगले 6 से 8 महीनों में इसका विस्तृत रोडमैप तैयार किया जाएगा।

इसके साथ ही मुंबई में ‘सर्क्युलर इकोनॉमी’ विकसित करने की योजना पर भी काम किया जाएगा, जिससे कचरा प्रबंधन, जल और वायु प्रदूषण जैसी समस्याओं का समाधान संभव होगा। अगले 2 से 3 वर्षों में इसके सकारात्मक परिणाम सामने आने की उम्मीद जताई गई है।
कुल मिलाकर, दावोस से महाराष्ट्र के लिए आया यह निवेश राज्य की अर्थव्यवस्था, औद्योगिक विकास और रोजगार सृजन के लिहाज़ से एक ऐतिहासिक कदम माना जा रहा है।