Home देशचिकन नेक पर सियासी साया? बांग्लादेश में जमात-ए-इस्लामी की 68 सीटें, 51 भारत सीमा से सटे इलाकों में जीत

चिकन नेक पर सियासी साया? बांग्लादेश में जमात-ए-इस्लामी की 68 सीटें, 51 भारत सीमा से सटे इलाकों में जीत

by ashishppandya90@gmail.com
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बांग्लादेश में 12 फरवरी को हुए संसदीय चुनाव के नतीजों ने नई दिल्ली की रणनीतिक चिंताओं को बढ़ा दिया है। जमात-ए-इस्लामी ने कुल 68 सीटों पर जीत दर्ज की है, जिनमें से 51 सीटें भारत की सीमा से लगे जिलों में स्थित हैं। यह स्थिति खासतौर पर भारत के पूर्वोत्तर और पश्चिम बंगाल के लिए अहम मानी जा रही है।


सीमावर्ती जिलों में निलफामारी, रंगपुर, कुरीग्राम, गैबांधा, चपैनवाबगंज, राजशाही, कुश्तिया, झेनैदा, जेसोर, खुलना, सतखीरा, मेहरपुर, शेरपुर, मैमनसिंग, सिलहट, नोआखली और चटगांव जैसे इलाके शामिल हैं। इनमें से कई जिले सीधे तौर पर पश्चिम बंगाल, असम, मेघालय और त्रिपुरा से सटे हुए हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह ट्रेंड भारत के ‘चिकन नेक’ यानी सिलीगुड़ी कॉरिडोर के लिहाज से संवेदनशील हो सकता है। यह कॉरिडोर पूर्वोत्तर भारत को मुख्य भूमि से जोड़ने वाला बेहद अहम भू-राजनीतिक मार्ग है। सीमावर्ती इलाकों में किसी भी तरह की कट्टरपंथी राजनीतिक मजबूती क्षेत्रीय सुरक्षा समीकरण को प्रभावित कर सकती है।

हालांकि जमात-ए-इस्लामी के अमीर शफीकुर रहमान ने चुनाव से पहले भारत के साथ दोस्ताना संबंध बनाए रखने की बात कही थी। एक भारतीय न्यूज चैनल को दिए इंटरव्यू में उन्होंने भारत को “सबसे करीबी पड़ोसी” बताया था। लेकिन राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह बयान घरेलू और अंतरराष्ट्रीय संतुलन साधने की रणनीति का हिस्सा भी हो सकता है।


ढाका के राजनीतिक जानकारों का आकलन है कि सीमावर्ती इलाकों में जमात की बढ़त के पीछे स्थानीय जनसांख्यिकीय बदलाव, सामाजिक नेटवर्क और जमीनी संगठनात्मक कामकाज अहम कारक रहे हैं। वहीं भारतीय सुरक्षा एजेंसियां इन नतीजों का बारीकी से अध्ययन कर रही हैं, ताकि संभावित प्रभावों का आकलन किया जा सके।
फिलहाल स्थिति पर नजर रखी जा रही है, लेकिन साफ है कि बांग्लादेश की यह सियासी तस्वीर भारत-बांग्लादेश संबंधों और पूर्वोत्तर की सुरक्षा रणनीति पर दूरगामी असर डाल सकती है।

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