Home दुनियागाज़ा में ‘शांतिदूत’ बनेगा भारत! ट्रंप ने पीएम मोदी को गाज़ा पीस बोर्ड में शामिल होने का भेजा न्योता

गाज़ा में ‘शांतिदूत’ बनेगा भारत! ट्रंप ने पीएम मोदी को गाज़ा पीस बोर्ड में शामिल होने का भेजा न्योता

by ashishppandya90@gmail.com
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मध्य पूर्व में शांति की दिशा में एक बड़े वैश्विक प्रयास के तहत भारत की भूमिका अहम होती दिख रही है। अमेरिका ने भारत को ‘गाज़ा पीस बोर्ड’ में शामिल होने का औपचारिक न्योता दिया है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर इस महत्वाकांक्षी शांति पहल में भागीदारी का आमंत्रण भेजा है। इसे भारत की बढ़ती वैश्विक कूटनीतिक साख और शांतिदूत की छवि के तौर पर देखा जा रहा है।

गाज़ा पीस बोर्ड राष्ट्रपति ट्रंप की एक व्यापक और दीर्घकालिक योजना का हिस्सा है, जिसका मकसद युद्ध के बाद गाज़ा में शासन व्यवस्था को स्थिर करना, पुनर्निर्माण की देखरेख करना और क्षेत्र को स्थायी शांति की ओर ले जाना है। ट्रंप ने 16 जनवरी को इस पीस बोर्ड का ऐलान किया था, जिसमें 20 बिंदुओं का एक विस्तृत शांति रोडमैप शामिल है। यह मॉडल भविष्य में दुनिया के अन्य संघर्ष क्षेत्रों में भी लागू किए जाने वाले मैकेनिज्म के तौर पर तैयार किया गया है।

अमेरिका की ओर से यह न्योता करीब 60 देशों को भेजा गया है, जिनमें यूरोप के कई प्रमुख देश भी शामिल हैं। भारत को इस सूची में शामिल किया जाना इस बात का संकेत है कि वॉशिंगटन गाज़ा संकट के समाधान में नई दिल्ली की संतुलित और विश्वसनीय भूमिका को अहम मान रहा है।

व्हाइट हाउस की ओर से 16 जनवरी को जारी प्रेस रिलीज़ में कहा गया कि राष्ट्रपति ट्रंप ने गाज़ा के प्रशासन के लिए ‘नेशनल कमेटी फॉर द एडमिनिस्ट्रेशन ऑफ़ गाज़ा’ यानी NCAG के गठन का स्वागत किया है। यह गाज़ा संघर्ष को समाप्त करने की व्यापक योजना के दूसरे चरण को लागू करने की दिशा में एक बड़ा कदम है। 20-सूत्रीय यह योजना क्षेत्र में स्थायी शांति, स्थिरता, पुनर्निर्माण और समृद्धि सुनिश्चित करने पर केंद्रित है।

शांति बोर्ड के विज़न को ज़मीन पर उतारने के लिए राष्ट्रपति ट्रंप की अध्यक्षता में एक संस्थापक कार्यकारी बोर्ड का गठन किया गया है। इस बोर्ड में अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो, स्टीव विटकॉफ़, जारेड कुश्नर, ब्रिटेन के पूर्व प्रधानमंत्री सर टोनी ब्लेयर, मार्क रोवन, अजय बंगा और रॉबर्ट गेब्रियल जैसे प्रभावशाली नाम शामिल हैं।

NCAG का नेतृत्व डॉ. अली शाअथ को सौंपा गया है। डॉ. शाअथ एक टेक्नोक्रेटिक नेता माने जाते हैं, जिनकी जिम्मेदारी गाज़ा में बुनियादी सार्वजनिक सेवाओं की बहाली, नागरिक संस्थानों के पुनर्निर्माण और दैनिक जीवन को स्थिर करने की होगी। साथ ही वे दीर्घकालिक और आत्मनिर्भर शासन की नींव रखने का काम करेंगे। प्रशासन, आर्थिक विकास और अंतरराष्ट्रीय संवाद में उनके अनुभव को इस मिशन के लिए अहम माना जा रहा है।

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव 2803 (2025) के अनुरूप इस शांति बोर्ड की स्थापना को अंतरराष्ट्रीय समर्थन भी मिला है। शांति बोर्ड राष्ट्रपति ट्रंप की 20-सूत्रीय योजना के सभी बिंदुओं को लागू करने में रणनीतिक निगरानी, अंतरराष्ट्रीय संसाधनों की जुटान और प्रभावी क्रियान्वयन की भूमिका निभाएगा।

कार्यकारी बोर्ड के प्रत्येक सदस्य को गाज़ा के स्थिरीकरण और दीर्घकालिक सफलता से जुड़े विशिष्ट क्षेत्रों की जिम्मेदारी दी गई है। इनमें शासन क्षमता निर्माण, क्षेत्रीय कूटनीति, पुनर्निर्माण, निवेश आकर्षण, बड़े पैमाने पर वित्तपोषण और पूंजी जुटाना शामिल है। बोर्ड के संचालन को मज़बूती देने के लिए आर्ये लाइटस्टोन और जोश ग्रुएनबाम को वरिष्ठ सलाहकार नियुक्त किया गया है।

गाज़ा के लिए निकोलाय म्लादेनोव को उच्च प्रतिनिधि नियुक्त किया गया है, जो शांति बोर्ड और NCAG के बीच सेतु का काम करेंगे। वहीं सुरक्षा व्यवस्था को मज़बूत करने के लिए मेजर जनरल जैस्पर जेफ़र्स को अंतरराष्ट्रीय स्थिरीकरण बल का कमांडर बनाया गया है, जिनकी जिम्मेदारी सुरक्षा, निरस्त्रीकरण और मानवीय सहायता की सुरक्षित आपूर्ति सुनिश्चित करना होगा।

प्रेस रिलीज़ में साफ कहा गया है कि अमेरिका इस पूरे ढांचे के समर्थन के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है और इज़रायल प्रमुख अरब देशों तथा अंतरराष्ट्रीय समुदाय के साथ मिलकर इस योजना के उद्देश्यों को हासिल करने के लिए काम करेगा।

ऐसे में भारत को मिला यह न्योता न सिर्फ गाज़ा संकट में उसकी संभावित भूमिका को रेखांकित करता है, बल्कि वैश्विक मंच पर भारत को एक जिम्मेदार और प्रभावी ‘शांतिदूत’ के रूप में भी स्थापित करता है।

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