Home देशकांग्रेस की गुलामी करने वालों को स्वाभिमान की भाषा शोभा नहीं भाजपा का संजय राउत पर करारा हमला

कांग्रेस की गुलामी करने वालों को स्वाभिमान की भाषा शोभा नहीं भाजपा का संजय राउत पर करारा हमला

by ashishppandya90@gmail.com
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महाराष्ट्र की सियासत में बयानबाज़ी का दौर तेज हो गया है। भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश मीडिया विभाग प्रमुख नवनाथ बन ने शिवसेना (उद्धव गुट) के नेता संजय राउत पर तीखा हमला बोला है। गुरुवार को भाजपा प्रदेश कार्यालय में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में नवनाथ बन ने कहा कि वंदनीय बालासाहेब ठाकरे के हिंदुत्व के विचारों को भूलकर कांग्रेस की “गुलामी” करने वाले संजय राउत को स्वाभिमान की बात करने का कोई नैतिक अधिकार नहीं है।

नवनाथ बन ने भारत-अमेरिका व्यापार समझौते को लेकर राउत के आरोपों पर भी पलटवार किया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में हुआ भारत-अमेरिका व्यापार करार पूरी तरह देशहित में और स्वाभिमान के साथ किया गया है। यह समझौता भारत की बढ़ती वैश्विक ताकत और मजबूत नेतृत्व का प्रमाण है। इसमें किसी भी प्रकार की गुलामी का सवाल ही नहीं उठता।

महापालिका में लगे ‘मोदी-मोदी’ और ‘देवाभाऊ’ के नारों पर प्रतिक्रिया देते हुए बन ने कहा कि ये नारे भाजपा महायुति सरकार के विकास और पारदर्शी नेतृत्व पर जनता के विश्वास को दर्शाते हैं। उन्होंने तंज कसते हुए सवाल किया कि महापालिका में प्रधानमंत्री मोदी के नारे नहीं लगेंगे तो क्या राउत या दाऊद के नारे लगेंगे?

अजित पवार के विमान हादसे को लेकर भी भाजपा ने विपक्ष पर राजनीति करने का आरोप लगाया। नवनाथ बन ने कहा कि यह हादसा बेहद दुर्भाग्यपूर्ण था और इसकी गंभीर जांच केंद्र व राज्य सरकार दोनों स्तरों पर की जा रही है। उन्होंने कहा कि शरद पवार स्वयं घातपात की आशंका को खारिज कर चुके हैं, फिर भी रोहित पवार इस संवेदनशील मुद्दे पर निराधार आरोप लगाकर जनता में भ्रम फैलाने का काम कर रहे हैं।

संजय राउत द्वारा लगाए गए भ्रष्टाचार संबंधी आरोपों को खारिज करते हुए बन ने कहा कि अगर राउत के पास कोई ठोस सबूत है तो उसे संबंधित जांच एजेंसियों को सौंपें। प्रेस कॉन्फ्रेंस कर हवा में आरोप लगाने से सच्चाई नहीं बदलती। उन्होंने भरोसा दिलाया कि उचित जांच के बाद सच्चाई सामने लाई जाएगी।

पूर्व राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी पर की गई टिप्पणी को लेकर भी भाजपा ने कड़ा एतराज़ जताया। नवनाथ बन ने कहा कि कोविड काल में कोश्यारी ने राज्य सरकार की कमियों को उजागर करने का काम किया था। अगर उस समय वे हस्तक्षेप नहीं करते तो महाराष्ट्र की स्थिति और गंभीर हो सकती थी।

इस बयानबाज़ी के बाद राज्य की राजनीति में आरोप-प्रत्यारोप और तेज होने के संकेत मिल रहे हैं।

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