Home देशकल्याण में सियासी भूचाल: राज ठाकरे ने शिंदे सेना से मिलाया हाथ ? उद्धव ठाकरे को बड़ा झटका !

कल्याण में सियासी भूचाल: राज ठाकरे ने शिंदे सेना से मिलाया हाथ ? उद्धव ठाकरे को बड़ा झटका !

by ashishppandya90@gmail.com
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महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर बड़े उलटफेर के संकेत मिल रहे हैं। कल्याण-डोंबिवली महानगरपालिका में मेयर पद को लेकर बने नए राजनीतिक समीकरणों ने ठाकरे परिवार की राजनीति को सीधे तौर पर झटका दिया है। राज ठाकरे की महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना और उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे की शिवसेना के बीच संभावित गठजोड़ की चर्चाएं तेज हो गई हैं, जिसे उद्धव ठाकरे गुट के लिए बड़ा राजनीतिक नुकसान माना जा रहा है।

कल्याण-डोंबिवली महानगरपालिका के हालिया चुनाव नतीजों के बाद यहां सत्ता संतुलन दिलचस्प मोड़ पर आ गया है। शिवसेना शिंदे गुट ने 53 और भाजपा ने 50 सीटें जीतकर कुल 103 सीटों के साथ स्पष्ट बहुमत हासिल किया है, जबकि बहुमत का आंकड़ा 62 है। इसके बावजूद महायुति के भीतर मेयर पद को लेकर सहमति नहीं बन पाई है। इसी खींचतान के बीच शिंदे गुट ने मेयर की कुर्सी सुनिश्चित करने के लिए मनसे से नजदीकियां बढ़ा ली हैं।

इन अटकलों को उस समय और मजबूती मिली जब शिवसेना शिंदे गुट के सांसद श्रीकांत शिंदे और नरेश म्हस्के ने नवी मुंबई स्थित कोंकण भवन का दौरा किया। इस दौरान मनसे नेता राजू पाटिल की मौजूदगी ने राजनीतिक गलियारों में नए गठबंधन की चर्चाओं को हवा दे दी। माना जा रहा है कि भाजपा को सत्ता से दूर रखने और मेयर पद पर पकड़ मजबूत करने के लिए शिंदे सेना और मनसे के बीच समझौते की रूपरेखा तैयार हो चुकी है।

उधर, महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना ने संगठन स्तर पर बड़ा फैसला लेते हुए प्रल्हाद म्हात्रे को कल्याण-डोंबिवली महानगरपालिका में पार्टी का नया गुटनेता नियुक्त किया है। केडीएमसी में मनसे के कुल पांच नगरसेवक हैं और इस नियुक्ति को सत्ता समीकरण में निर्णायक भूमिका निभाने की तैयारी के तौर पर देखा जा रहा है।

शिंदे गुट के सांसद नरेश म्हस्के ने गठबंधन के संकेत देते हुए कहा कि मनसे कोई AIMIM नहीं है, इसलिए उनके साथ आने में कोई आपत्ति नहीं होनी चाहिए। यह बयान साफ तौर पर दर्शाता है कि शिंदे गुट मनसे के समर्थन को लेकर सकारात्मक रुख अपनाए हुए है।

राज ठाकरे और शिंदे सेना की बढ़ती नजदीकियां उद्धव ठाकरे के लिए राजनीतिक रूप से बड़ा झटका मानी जा रही हैं। माना जा रहा है कि कल्याण-डोंबिवली का यह सियासी प्रयोग आने वाले मुंबई बीएमसी चुनावों की रणनीति को भी प्रभावित कर सकता है। फिलहाल, केडीएमसी में मेयर की कुर्सी को लेकर जारी इस राजनीतिक खींचतान ने महाराष्ट्र की राजनीति में नई हलचल जरूर पैदा कर दी है।

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